वर्तमान में पूरी दुनिया प्राकृतिक जलवायु घटना 'अल नीनो' (El Niño) के गंभीर और अप्रत्याशित प्रभावों से जूझ रही है। स्पेनिश भाषा में 'अल नीनो' का अर्थ 'छोटा लड़का' होता है। 1600 के दशक में दक्षिण अमेरिका के मछुआरों ने सबसे पहले इस शब्द का इस्तेमाल किया था, जब उन्होंने समुद्र के गर्म पानी का मछलियों, भारी बारिश और तूफानों पर असर देखा था। आमतौर पर इसका असर क्रिसमस के आसपास नजर आता था, लेकिन इस साल यह अपने तय समय से पहले ही और अधिक शक्तिशाली रूप धारण कर चुका है।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, इस बार का अल नीनो 1950 के बाद से दर्ज सबसे मजबूत चक्रों में से एक है, जिसके प्रभाव फरवरी 2027 तक बने रहने की आशंका है। इस वैश्विक जलवायु बदलाव ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बेहद विपरीत और चौंकाने वाली तस्वीरें पेश की हैं।

जापान की राजधानी टोक्यो में रिकॉर्ड तोड़ बारिश

एक तरफ जहां दुनिया के कुछ हिस्से सूखे और गर्मी से परेशान हैं, वहीं जापान की राजधानी टोक्यो में अल नीनो के कारण मौसम पूरी तरह बेपटरी हो गया है।

  • 35 दिनों का लंबा दौर: टोक्यो में लगातार 35 दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहा, जो 1886 के बाद से अब तक का सबसे लंबा दौर है। इससे पहले 2019 में 33 दिनों तक लगातार बारिश का रिकॉर्ड था।
  • सूरज के दर्शन दुर्लभ: 'मैनीची शिंबुन' की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर महीने में मध्य टोक्यो में सामान्य से लगभग तीन गुना अधिक बारिश दर्ज की गई। इस दौरान मात्र 45.8 घंटे ही धूप खिली और लगातार 14 दिन ऐसे रहे जब आसमान में सूरज बिल्कुल दिखाई नहीं दिया।
  • जनजीवन पर असर: लंबी मानसूनी बारिश के कारण सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे और पर्यटन उद्योग को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।

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चिली के अटाकामा रेगिस्तान में कुदरत का चमत्कार

इसके उलट, दक्षिण अमेरिका के चिली स्थित अटाकामा रेगिस्तान में अल नीनो एक वरदान बनकर आया। दुनिया के सबसे सूखे गैर-ध्रुवीय रेगिस्तान के रूप में पहचाने जाने वाले इस इलाके में भारी बारिश के कारण एक अद्भुत और दुर्लभ नजारा देखने को मिला।

  • 200 से अधिक प्रजातियों के खिले फूल: सितंबर माह में हुई मूसलाधार बारिश के बाद अटाकामा रेगिस्तान में लगभग 200 अलग-अलग प्रजातियों के करोड़ों फूल खिल उठे। दूर-दूर तक फैली इस बैंगनी फूलों की चादर ने रेगिस्तान के सूखे भूगोल को पूरी तरह बदल दिया।
  • अभूतपूर्व बारिश: चिली की राष्ट्रीय वानिकी संस्था (CONAF) के जैव विविधता प्रमुख सीजर पिजारो के अनुसार, 1950 के दशक में रिकॉर्ड रखे जाने की शुरुआत के बाद से इस क्षेत्र में कभी इतनी बारिश नहीं देखी गई थी। कुछ इलाकों में तो 180 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की चेतावनी

WMO ने आगाह किया है कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच वैश्विक स्तर पर समुद्र की सतह का तापमान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच सकता है। यह गंभीर जलवायु परिवर्तन इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में मौसम के चरम रूप और अधिक देखने को मिल सकते हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर कृषि, अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी तंत्र को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

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