कोलकाता / नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है।

"आज के भारत में चुनाव चुराए जा रहे हैं"

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक रिपोर्ट साझा करते हुए CJP प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि पुलिस और तृणमूल कांग्रेस से आए दलबदलू नेताओं की मदद से नंदीग्राम में चुनावी नतीजे प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

सौरव दास ने लिखा: "ज्ञानेश कुमार का ट्रैक रिकॉर्ड यही रहा है—ऐसे चुनाव जो न तो स्वतंत्र थे और न ही निष्पक्ष। रिपोर्ट से स्पष्ट पता चलता है कि आज के भारत में चुनाव कैसे चुराए जा रहे हैं। अब बहुत हो चुका।"

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नंदीग्राम का चुनाव: बीजेपी सरकार के लिए पहली बड़ी परीक्षा

पश्चिम बंगाल में 15 वर्षों के तृणमूल शासन के खात्मे के बाद मई में सत्ता संभालने वाली बीजेपी सरकार के लिए यह उपचुनाव एक अहम लिटमस टेस्ट माना जा रहा है।

  • सीट खाली होने की वजह: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद उन्होंने भवानीपुर सीट बरकरार रखी, जिसके कारण नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव की जरूरत पड़ी।
  • बीजेपी उम्मीदवार: भाजपा ने अपने दिवंगत नेता चंद्रनाथ रथ की मां हासिरानी रथ को मैदान में उतारा है। चंद्रनाथ की चुनावी जीत के दो दिन बाद 6 मई को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
  • विपक्ष का समीकरण: टीएमसी उम्मीदवार संचित प्रधानी डे द्वारा नाम वापस लिए जाने के बाद ममता बनर्जी ने अपने दल का उम्मीदवार न होने पर कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया है।

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राजनीतिक मायने

नंदीग्राम ऐतिहासिक रूप से बंगाल की राजनीति का केंद्र रहा है। यह वही क्षेत्र है जहाँ से ममता बनर्जी के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने 2011 में वाममोर्चे का किला ढहाया था। अब इस उपचुनाव से न केवल बीजेपी सरकार के प्रति जनता के शुरुआती रुझान का पता चलेगा, बल्कि यह भी तय होगा कि विपक्ष में कौन सी पार्टी मुख्य चुनौती बनकर उभरती है।

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