नई दिल्ली:

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उद्योगपति अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड (RPL) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए भारत में स्थित 2,000 करोड़ रुपये से अधिक (लगभग 2,032.81 करोड़ रुपये) की परिसंपत्तियों को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत की गई है, जिसमें विदेशी निवेश और धन के कथित गोलचक्कर (मनी लॉन्ड्रिंग/फंड सर्कुलेशन) का गंभीर आरोप है।

जब्त परिसंपत्तियों में क्या-क्या शामिल?

ईडी द्वारा जारी जब्ती आदेश 12 अक्टूबर को FEMA की धारा 37ए के तहत जारी किया गया। इसके तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित संपत्तियां कुर्क की गई हैं:

  • रिलायंस पावर लिमिटेड (RPL) के विभिन्न बैंक शेष (Bank Balances)।
  • सासन पावर लिमिटेड में कंपनी की शेयरधारिता (Shareholding)।

क्या है पूरा मामला और फेमा जांच का आधार?

यह पूरी जांच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की एक कार्रवाई से शुरू हुई थी, जिसमें आरपीएल द्वारा अपनी लेखा-पुस्तकों (Books of Accounts) में 2,101.46 करोड़ रुपये के बट्टे खाते में डालने (Write-off) या प्रावधानों का मामला सामने आया था। ये फंड ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) और केमैन आइलैंड्स की कंपनियों में किए गए विदेशी निवेश और अग्रिमों से जुड़े थे।

ईडी के अनुसार:

  1. बॉन्ड और विदेशी निवेश: रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड (जो बाद में आरपीएल में विलय हो गई) ने वर्ष 2006 में 300 मिलियन डॉलर के विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड (FCCB) जुटाए थे।
  2. सिंगापुर और जिनेवा कनेक्शन: इसमें से 275 मिलियन डॉलर का निवेश उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सिंगापुर सहायक कंपनी (RNRL-S) में किया गया। इस राशि को जिनेवा स्थित डॉयचे बैंक में जमा कराया गया और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स की संस्थाओं को दिए गए ऋणों के लिए गिरवी (Collateral) के रूप में इस्तेमाल किया गया।

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अनिल अंबानी समूह पर मुख्य आरोप

  • मुखौटा कंपनियों का इस्तेमाल: जांच में सामने आया कि BVI की ये संस्थाएं रिलायंस अनिल अंबानी समूह (RAAG) द्वारा भारत से ही नियंत्रित और प्रबंधित की जा रही थीं, जहाँ मुखौटा व्यक्तियों ने समूह के निर्देशों पर काम किया।
  • फंड का गोलचक्कर: ईडी का आरोप है कि ऋण आय का उपयोग मॉरीशस स्थित विदेशी संस्थाओं के माध्यम से भारत में धन के अस्थायी गोलचक्कर के लिए किया गया, जिससे समूह को लाभ हुआ और धन भारत के बाहर ही रखा गया।
  • दस्तावेजों में हेरफेर: ईडी के मुताबिक, जब BVI संस्थाएं ऋण चुकाने में विफल रहीं, तो यह दर्शाने के लिए पिछले तारीख (Backdated) के दस्तावेज गढ़े गए कि इंडोनेशियाई सहायक कंपनियों द्वारा ये अग्रिम वास्तविक व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए दिए गए थे।

कंपनी की प्रतिक्रिया

रिलायंस पावर ने इस नियामक कार्रवाई को खारिज करते हुए इसे विवादित बताया है। कंपनी का कहना है कि वह अपने और अपने सभी शेयरधारकों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी सलाह के आधार पर उचित और आवश्यक कदम उठाएगी।

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