वाशिंगटन/लंदन।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन के 'RAF फेयरफोर्ड' एयरबेस से अमेरिका के B-1 बॉम्बर विमानों को वापस स्वदेश बुलाने के फैसले की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय ईरान से जुड़ी संभावित सुरक्षा धमकियों और आतंकी हमलों की आशंका के मद्देनजर एहतियातन लिया गया है।
‘हमें खतरे का अंदाजा था, रिस्क क्यों लेते?’
पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि प्रशासन को एयरबेस पर खतरे की आशंका थी, इसलिए विमानों को रणनीतिक रूप से स्थानांतरित करना ही सही कदम था।
- ट्रंप का बयान: "हमें अंदाजा था कि वहां खतरा हो सकता है। जब हमें धमकी दी जा रही है, तो हम उन्हें वहां क्यों छोड़े रखते? विमानों को सुरक्षित जगह पर स्थानांतरित करने में बहुत कम खर्च आता है।"
- इरानी संलिप्तता का इशारा: जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या इन धमकियों का संबंध ईरान से है, तो उन्होंने कहा, "हां, उनका संबंध ईरान से हो सकता है।"
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ब्रिटेन में संदिग्ध साजिश और गिरफ्तारी के बाद फैसला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना ने RAF फेयरफोर्ड बेस पर संदिग्ध आतंकी साजिश की जांच के बाद अपने लगभग एक दर्जन B-1 बॉम्बर विमानों को वापस अमेरिका स्थित बेस पर भेज दिया है।
- क्या था मामला: हाल ही में RAF फेयरफोर्ड बेस के पास से संदिग्ध गतिविधियों के आरोप में 5 लोगों को हिरासत में लिया गया था। बाद में लंदन में एक ब्रिटिश-ईरानी नागरिक को भी आतंकी हमले की साजिश के संदेह में गिरफ्तार किया गया था।
- बेस का महत्व: RAF फेयरफोर्ड एयरबेस का इस्तेमाल अमेरिकी सेना ने हाल ही में मध्य पूर्व और ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों में किया था।
अमेरिकी नेतृत्व के अन्य बयान
- उपराष्ट्रपति जेडी वेंस: जेडी वेंस ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि ईरान पिछले कई दशकों से आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सैन्य संसाधनों और जवानों की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क है।
- विदेश मंत्री मार्को रुबियो: दूसरी तरफ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने किसी सीधे संबंध पर नरमी दिखाते हुए कहा कि पेंटागन अपनी रणनीतिक जरूरतों के हिसाब से संसाधनों और विमानों की री-डिप्लॉयमेंट (पुनर्नियोजन) करता रहता है।
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ईरान की प्रतिक्रिया
ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम और अन्य अधिकारियों द्वारा घटना में ईरान की ओर इशारा किए जाने पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर यूके के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यूके गलत दिशा में जांच कर रहा है।
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