मध्य प्रदेश के उज्जैन में 'सिंहस्थ 2028' की तैयारियों के तहत कंठाल से गोपाल मंदिर तक चलाए जा रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान के बीच 'खड़े हनुमान मंदिर' को लेकर विवाद गहरा गया है। इस पूरे मामले में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के प्रवेश और प्रशासन द्वारा IIT इंदौर व SGSITS इंदौर की तकनीकी टीमों को बुलाए जाने के बाद स्थिति काफी दिलचस्प हो गई है।

उमा भारती की चिट्ठी: भोपाल मॉडल का दिया हवाला

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर विकास और आस्था के बीच संतुलन बनाने की अपील की है।

  • शहर की गरिमा का जिक्र: उमा भारती ने कहा कि CM मोहन यादव खुद उज्जैन से हैं और धार्मिक स्थलों की गरिमा को भली-भांति समझते हैं।
  • भोपाल का उदाहरण: उन्होंने याद दिलाया कि भोपाल में कमलापति पार्क के पास सड़क चौड़ीकरण के दौरान मस्जिद को हटाए बिना सड़क का नक्शा बदल दिया गया था। ठीक उसी तर्ज पर उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर को बचाते हुए रास्ता निकाला जा सकता है।
  • विकास और आस्था: भाजपा सरकारें हमेशा आस्था और विकास को साथ लेकर चलती हैं, इसलिए श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट और मंदिर का पेच

उज्जैन नगर निगम द्वारा 450 मीटर लंबे रास्ते को 9 मीटर से बढ़ाकर 15 मीटर चौड़ा करने की योजना है।

  • 4 धार्मिक स्थल: इस रास्ते में चार धार्मिक इमारतें आ रही थीं, जिनमें से प्रशासन के अनुसार गणेश मंदिर को सहमति से दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया है।
  • सोशल मीडिया के दावे और प्रशासन की सफाई: सोशल मीडिया पर खबरें थीं कि कई कोशिशों के बावजूद हनुमान जी की प्रतिमा नहीं हिली। हालांकि, उज्जैन SDM एलएन गर्ग और एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर संतोष टैगोर ने साफ किया है कि प्रतिमा को हाथ या मशीन से हटाने की कोई कोशिश नहीं की गई है और ये दावे गुमराह करने वाले हैं।
"हनुमान मूर्ति के सटीक विश्लेषण के लिए SGSITS और IIT इंदौर की तकनीकी टीम को बुलाया जा रहा है। जब तक स्थिति और इंजीनियरिंग पहलू पूरी तरह समझ नहीं आ जाते, तब तक कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।"
— संतोष टैगोर, एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर

इंजीनियरिंग, पुरातत्व और आस्था का सवाल

प्रशासन के अनुसार मंदिर के पुजारी ने स्थानांतरण की सहमति दी थी और नए चबूतरे की तैयारी चल रही है। हालांकि, तकनीकी सलाह के बिना कोई कदम न उठाने के फैसले के बाद अब यह मामला केवल एक बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का काम न रहकर इंजीनियरिंग, पुरातत्व, आस्था और विरासत से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।