कोलकाता

पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने नक्सल विरोधी अभियानों में एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में करीब चार दशकों से माओवादी गतिविधियों की कमान संभाल रहे भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ तिमिर उर्फ मनोज को पूर्व मेदिनीपुर जिले के पोटाशपुर इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया है।

असीम मंडल पर राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से ₹1 करोड़ का इनाम घोषित था। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से दो बैग बरामद किए गए हैं, जिनमें भारी मात्रा में माओवादी साहित्य, प्रचार पुस्तिकाएं और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं।

विद्यार्थी जीवन से माओवादी नेटवर्क के शीर्ष तक

पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना (फुलचक गांव) के निवासी 64 वर्षीय असीम मंडल का माओवादी सफर छात्र जीवन से ही शुरू हो गया था:

  • शुरुआती दौर: कट्टर वामपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर वह 'पीपुल्स वार ग्रुप' (PWG) में शामिल हुआ। उसने बंगाल के सारेंगा, गोआलतोड़ और झारखंड के पूर्वी सिंहभूम (गुराबंदा) में माओवादी कैडर को मजबूत किया।
  • भाकपा (माओवादी) का गठन: 21 सितंबर 2004 को संगठन के औपचारिक गठन के बाद उसने जंगलमहल में हिंसक आंदोलनों को हवा दी।
  • लालगढ़ आंदोलन और नेतृत्व: चर्चित लालगढ़ आंदोलन में मुख्य भूमिका निभाने वाले असीम मंडल को वर्ष 2010 में भाकपा (माओवादी) की 'पश्चिम बंगाल स्टेट कमेटी' का सचिव बनाया गया। इसके अतिरिक्त वह बंगाल-झारखंड-ओडिशा (BJO) क्षेत्रीय कमेटी का भी प्रमुख सदस्य रहा।
  • सारंडा का सुरक्षित ठिकाना: वर्ष 2011 में शीर्ष नक्सली नेता किशनजी के एनकाउंटर के बाद असीम मंडल झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम स्थित सारंडा के घने जंगलों में शिफ्ट हो गया था और वहीं से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा था।

जंगल से पोटाशपुर तक: कैसे चढ़ा STF के हत्थे?

हाल के महीनों में संगठन के कई बड़े कैडरों के आत्मसमर्पण के बाद असीम मंडल सुरक्षा बलों की सख्त रडार पर था।

अगस्त 2026 में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से पूछताछ में खुलासा हुआ था कि गिरते स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के बावजूद असीम मंडल मुख्यधारा में लौटने को तैयार नहीं था और वह पुनः जंगलमहल में अपनी जड़ें जमाने की फिराक में था।

गिरफ्तारी की कड़ियां:

  • हथियार छोड़ भागा: 13-14 अगस्त के आसपास गिरते स्वास्थ्य के कारण वह जंगल में अपनी AK-47 राइफल व दस्तावेज छोड़कर कार से सुरक्षित ठिकाने की ओर निकल गया था।
  • भेष बदलकर शरण: वह करीब ₹1.5 लाख नकद लेकर अपने रिश्तेदारों और परिचितों के ठिकानों पर भेष बदलकर शरण ले रहा था।
  • अंतिम जाल: जब वह यात्रा खर्च के लिए अपने एक परिचित से पैसे लेने पूर्व मेदिनीपुर के पोटाशपुर पहुंचा, तो वहां पहले से तैनात कोलकाता STF की टीम ने उसे धर दबोचा।

परिवार और वर्तमान स्थिति

  • पत्नी भी जेल में दर्ज: असीम मंडल की पत्नी मालती, जो कि पूर्व मेदिनीपुर के पोटाशपुर की ही निवासी और माओवादी कैडर रही है, को STF ने वर्ष 2010 में ही गिरफ्तार कर लिया था और वह वर्तमान में जेल में बंद है।
  • अंगरक्षक की तलाश जारी: पुलिस के अनुसार, असीम मंडल का प्रमुख अंगरक्षक 'मंगल' और उसकी पत्नी के कुछ अन्य सहयोगी अभी भी जंगलों में छिपे हो सकते हैं, जिनकी तलाश में सघन अभियान जारी है।

सुरक्षा बलों के अनुसार असीम मंडल की यह गिरफ्तारी पूरे क्षेत्र में बचे-खुचे माओवादी तंत्र के लिए एक रीढ़ तोड़ने वाला झटका साबित होगी।