गांवों और छोटे कस्बों में डेयरी और पोल्ट्री (मुर्गी पालन) का कारोबार अब केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ बड़ा बिजनेस बन चुका है। दूध, दही, पनीर, पोल्ट्री और अंडों की बिक्री से लोग अब तगड़ा मुनाफा कमा रहे हैं। हालांकि, किसी भी बिजनेस को कानूनी रूप से सही ढंग से चलाने के लिए उसके नियमों को जानना जरूरी है। ऐसे में नए कारोबारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या उन्हें GST (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) रजिस्ट्रेशन कराना होगा या नहीं?

इसका सीधा जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आपके प्रोडक्ट का रूप कैसा है और आपका टर्नओवर कितना है।

1. खुले और ताजे प्रोडक्ट्स: GST से पूरी तरह राहत

GST नियमों के तहत प्राथमिक और गैर-प्रसंस्कृत (Unprocessed) खाद्य पदार्थों को टैक्स से बाहर रखा गया है। अगर आपका बिजनेस केवल निम्नलिखित चीजों से जुड़ा है, तो आपको सामान्य तौर पर GST रजिस्ट्रेशन की कोई आवश्यकता नहीं है:

  • ताजा और पाश्चराइज्ड दूध
  • खुले में बिकने वाला दही, लस्सी और छाछ
  • ताजे और कच्चे अंडे
  • बिना पैकेजिंग या ब्रांडिंग वाले बुनियादी पोल्ट्री प्रोडक्ट्स

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2. कब अनिवार्य हो जाता है GST रजिस्ट्रेशन?

अगर आप साधारण खुले माल की जगह पैकेज्ड, लेबल वाले या प्रोसेस्ड प्रोडक्ट्स बेचना शुरू करते हैं, तो नियम बदल जाते हैं। ऐसी स्थिति में यदि आपका सालाना टर्नओवर तय सीमा (वस्तुओं की बिक्री के लिए आमतौर पर 40 लाख रुपये) को पार करता है, तो GST रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो जाता है।

3. किन डेयरी प्रोडक्ट्स पर कितना लगता है GST?

अगर आप ब्रांडेड, पैकेज्ड या प्रसंस्कृत (Processed) मिल्क प्रोडक्ट्स बेच रहे हैं, तो उन पर 5% GST लागू होता है। इस दायरे में आने वाले प्रमुख प्रोडक्ट्स निम्नलिखित हैं:

प्रोडक्ट की श्रेणीशामिल उत्पादGST दर
ब्रांडेड व पैकेज्ड डेयरीलेबल वाले पैकेट बंद दही, लस्सी, छाछ5%
घी और मक्खनप्री-पैक्ड और लेबल लगे घी, बटर और फैट5%
मिल्क पाउडर व कंडेंस्ड मिल्कस्किम्ड मिल्क पाउडर, मीठा या फ्लेवर्ड कंडेंस्ड मिल्क5%
अन्य मिल्क प्रोडक्ट्सदूध के प्राकृतिक घटकों से बने अन्य प्रसंस्कृत (Processed) खाद्य पदार्थ5%

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कारोबारियों के लिए काम की सलाह

यदि आप सिर्फ स्थानीय स्तर पर दूध या ताजे अंडों की सप्लाई खुले में कर रहे हैं, तो आपको टैक्स की चिंता करने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आप अपने डेयरी या पोल्ट्री प्रोडक्ट्स को पैकिंग, अपने ब्रांड के लेबल या फ्लेवरिंग के साथ मार्केट में उतारने की योजना बना रहे हैं, तो शुरुआत में ही GST नियमों को समझ लें ताकि आगे चलकर किसी तरह की कानूनी या वित्तीय समस्या का सामना न करना पड़े।