चुनाव आयोग (ECI) के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। इस गरमाए माहौल के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस द्वारा पारंपरिक प्रदर्शन स्थल 'जंतर-मंतर' को विरोध प्रदर्शनों की सूची से हटाकर अन्य तीन नए स्थान तय किए जाने के बाद से तनाव और बढ़ गया है। पुलिस की इस पाबंदी और CJP (सिटिज़न्स फ़ॉर जस्टिस एंड पीस) के नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में अब छात्र संगठन भी सड़कों पर उतर आए हैं।
राजीव चौक मेट्रो स्टेशन और कनॉट प्लेस पर जोरदार प्रदर्शन
मंगलवार को कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) के कार्यकर्ताओं ने राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 7 के बाहर अचानक जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तत्काल इस्तीफे की मांग की। सुरक्षा बलों और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है।
इसके अलावा, छात्र संगठन 'दिशा' के सदस्यों ने भी कनॉट प्लेस से विरोध मार्च निकाला। उनका मुख्य विरोध इस बात को लेकर था कि दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दे रही है। उन्होंने मांग की कि जंतर-मंतर को दोबारा आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची में शामिल किया जाए और हिरासत में लिए गए सभी CJP नेताओं व कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा किया जाए।
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वकीलों के मुलाक़ात पर रोक और CJP का तीखा हमला
दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर पर हिरासत में लिए गए CJP नेताओं के मामले में वकीलों ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। हिरासत में लिए गए नेताओं— सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे सहित 11 अन्य लोगों के वकील पुष्प शर्मा ने बताया कि पुलिस हिरासत में बंद उनके मुवक्किलों से मिलने और उनके कानूनी अधिकारों का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने थाना प्रभारी (SHO) से कई बार गुहार लगाने के बावजूद मुलाकात न होने देने पर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।
वहीं, CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी टीम ने शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराया था, लेकिन पुलिस ने उनके साथियों को जबरन हिरासत में ले लिया। अभिजीत दीपके ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि देश की राजधानी में जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराना कानून का उल्लंघन माना जाता है, तो ऐसा सोचने वाले लोग खुद देशविरोधी हैं।
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