रांची (झारखंड): झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में गड़बड़ी के विरोध में छात्रों का आंदोलन 8 अगस्त 2026 को लगातार 15वें दिन भी जारी रहा। बढ़ते विवाद के बीच राज्य सरकार ने छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का सिलसिला शुरू किया है। इस दौरान भाजपा और आजसू से जुड़े छात्र संगठनों को छोड़कर अन्य सभी हितधारकों के प्रतिनिधियों से संवाद किया जा रहा है।
NSUI की मुख्य मांगें: 14वीं JPSC रद्द हो और 90 दिनों में हो जांच
बातचीत की कड़ी में सबसे पहले नरेंद्र महतो गुट के प्रतिनिधियों से चर्चा की गई। इसके बाद NSUI के एक प्रतिनिधिमंडल ने सरकारी कमेटी से मुलाकात की और छात्रों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अपना 5 सूत्री मांग पत्र सौंपा।
रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा ने बातचीत की इस पहल का स्वागत करते हुए बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
- तत्काल प्रभाव से रद्दीकरण: 14वीं JPSC परीक्षा को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए।
- समयबद्ध जांच: अब तक आयोजित सभी संदिग्ध परीक्षाओं की CID या SIT के माध्यम से 90 दिनों के भीतर जांच कराई जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- पारदर्शिता: आगामी सभी भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
- वार्षिक कैलेंडर: परीक्षाओं के आयोजन के लिए एक निश्चित वार्षिक कैलेंडर (Annual Calendar) लागू हो।
- एजेंसियों पर निर्भरता खत्म: परीक्षा कराने की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों को देने के बजाय सरकार स्वयं पूरी प्रक्रिया का संचालन करे।
'छात्रों की मांगें जायज, मुख्यमंत्री लेंगे सकारात्मक निर्णय': मंत्री सुदिव्य कुमार
उम्मीदवारों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार इस आंदोलन से जुड़े सभी हितधारकों की बात को गंभीरता से सुन रही है।
उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, "NSUI प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगें और सुझाव दिए हैं। हमने उनके मांग पत्र का गंभीरता से अध्ययन किया है और उनकी मांगें काफी जायज प्रतीत होती हैं। जब इन बातों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा, तो हमें पूर्ण विश्वास है कि सरकार की ओर से एक सकारात्मक और समाधानप्रद निर्णय सामने आएगा।"
शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद
राजधानी रांची में पिछले दो हफ्तों से चल रहे इस आंदोलन से परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं में भारी निराशा और आक्रोश है। हालांकि, सरकार द्वारा वार्ता के रास्ते खोलने से अब इस गतिरोध का जल्द सकारात्मक हल निकलने की उम्मीद जताई जा रही है।





