रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। बुधवार को रांची स्थित विशेष प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) अदालत ने 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और धोखाधड़ी से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं।
इसके साथ ही, झारखंड हाईकोर्ट से भी मुख्यमंत्री सोरेन को कोई तात्कालिक राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने स्पेशल PMLA कोर्ट द्वारा आरोप तय करने की चल रही प्रक्रिया पर रोक लगाने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया।
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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए हुई पेशी
विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में मुख्यमंत्री सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। PMLA कोर्ट ने उनके खिलाफ अधिनियम की धारा 3 (मनी लॉन्ड्रिंग) के तहत आरोप तय करते हुए मामले को अब नियमित सुनवाई के लिए आगे बढ़ा दिया है। अधिवक्ता संजीव सहाय ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि कोर्ट ने सुनवाई का अगला चरण शुरू करने का निर्देश दिया है।
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हाईकोर्ट ने केंद्र और ED से मांगा जवाब
मुख्यमंत्री सोरेन ने PMLA कोर्ट में आरोप तय करने की वैधता को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएस सोनाक और जस्टिस मनोज प्रसाद की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल याचिका लंबित होने के आधार पर निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक नहीं लगाई जा सकती। इस मामले पर हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।
इससे पहले, व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेशी से छूट की मांग वाली सोरेन की इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन (IA) को भी जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की बेंच ने खारिज कर दिया था।
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