नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर यदि बीते 12 वर्षों में भारत के टेक्नोलॉजी और डिजिटल परिदृश्य में आए परिवर्तनों का आकलन करें, तो देश ने अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2014 से लेकर 2026 के मध्य डिजिटल पेमेंट, टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस कंप्यूटिंग के क्षेत्र में भारत वैश्विक पटल पर एक प्रमुख शक्ति बनकर उभरा है।
प्रमुख डिजिटल और तकनीकी क्षेत्रों की प्रगति दर (2014-15 बनाम 2025-26)
| क्षेत्र / मापदंड | स्थिति (2014-15 / शुरुआत) | स्थिति (2025-26 / वर्तमान) | मुख्य बदलाव |
| वार्षिक UPI ट्रांजेक्शन | 1.78 करोड़ (FY 2016-17) | 24,162 करोड़ (241.6 अरब) | विश्व के कुल रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन में 49% हिस्सेदारी। |
| UPI लेन-देन वैल्यू | ₹0.07 लाख करोड़ | ~₹314 लाख करोड़ | 10 से अधिक देशों में यूपीआई सेवाएं उपलब्ध। |
| मोबाइल डेटा की कीमत | ₹269 प्रति GB | ₹10 - ₹14 प्रति GB | डेटा दरें आम जनता के लिए सर्वाधिक सस्ती हुईं। |
| औसत डेटा खपत | 0.3 GB / यूजर / महीना | 20 GB+ / यूजर / महीना | इंटरनेट उपयोग में कई गुना की भारी वृद्धि। |
| मोबाइल उत्पादन (वैल्यू) | ₹18,000 करोड़ | ₹6.27 लाख करोड़ | उत्पादन में 33 गुना की रिकॉर्ड बढ़ोतरी। |
| मोबाइल निर्यात (Export) | ₹1,500 करोड़ | ₹2.59 लाख करोड़ | भारत में बिकने वाले 99% से ज्यादा फोन ‘मेड इन इंडिया’। |
| जन सेवा केंद्र (CSC) | 80,000 | 5.5 लाख से अधिक | ग्रामीण स्तर पर डिजिटल सेवाओं की सहज पहुंच। |
1. यूपीआई: वैश्विक स्तर पर डिजिटल पेमेंट का सिरमौर
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने भारत में आम नागरिकों के जीवन और व्यापार करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहां केवल 1.78 करोड़ यूपीआई लेनदेन हुए थे, वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा रिकॉर्ड 24,162 करोड़ तक पहुंच गया। आज दुनिया के लगभग आधे रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजेक्शन भारत में हो रहे हैं और 10 से ज्यादा देशों ने यूपीआई सिस्टम को अपनाया है।
2. 5G का सबसे तेज रोलआउट और भारतनेट का विस्तार
1 अक्टूबर 2022 को लॉन्च होने के मात्र 21 महीनों के भीतर 5G नेटवर्क देश के 730 से अधिक जिलों तक पहुंच गया, जिसे दुनिया का सबसे तेज रोलआउट माना गया।
- ग्रामीण कनेक्टिविटी: 'भारतनेट' परियोजना के माध्यम से 2.13 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को सर्विस-रेडी किया जा चुका है, जिससे डिजिटल खाई को पाटने में सफलता मिली है।
3. मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग से सेमीकंडक्टर और AI मिशन तक
भारत अब केवल इलेक्ट्रॉनिक्स का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक प्रमुख निर्माता और निर्यातक बन चुका है:
- सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम: ₹76,000 करोड़ के बजट के साथ शुरू हुए 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' के तहत गुजरात के साणंद और असम के मोरीगांव में टाटा, माइक्रोन, कायन्स और सीजी पावर जैसे दिग्गज समूहों द्वारा चिप निर्माण और असेंबली यूनिट्स स्थापित की जा रही हैं।
- इंडिया AI मिशन: देश को कृत्रिम बुद्धिमत्ता में अग्रणी बनाने के लिए ₹10,372 करोड़ के 'इंडिया एआई मिशन' के तहत 10,000 से अधिक जीपीयू (GPU) की क्षमता वाला कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है।





