अगरतला: त्रिपुरा में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और खेती के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने एक बहुत बड़ा और सफल अभियान चलाया है। सिपाहीजाला जिले के राधानगर वन क्षेत्र समेत देबीपुर और उरंगन बारी इलाकों में लगभग 25 एकड़ वन भूमि पर अवैध रूप से उगाए जा रहे गांजे के 37,000 पौधों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है।
बहु-एजेंसी समन्वय से की गई कार्रवाई
इस बड़े संयुक्त अभियान को अंजाम देने के लिए देश और राज्य की कई प्रमुख सुरक्षा एजेंसियां एक साथ मैदान में उतरी थीं। इस ऑपरेशन में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), त्रिपुरा पुलिस, वन विभाग और त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (TSR) ने आपसी तालमेल का बेहतरीन उदाहरण पेश किया।
केंद्र सरकार के 'नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-29' के तहत यह रणनीति बनाई गई है, जिसके अंतर्गत देश से और खासकर इन संवेदनशील इलाकों से दिसंबर 2027 तक अवैध गांजे व अफीम की खेती को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी रणनीति के तहत यह बड़ी कार्रवाई की गई है।
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सोनमुरा में 327 किलो से अधिक सूखा गांजा बरामद
एक अन्य बड़ी सफलता के तहत, सोनमुरा पुलिस स्टेशन को मिली गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए बीएसएफ की 81वीं बटालियन और टीएसआर की 11वीं बटालियन ने संयुक्त रूप से कमलनगर (कृष्णडोला) इलाके में छापेमारी की।
- बरामदगी: तलाशी के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने 7 प्लास्टिक के ड्रमों में छिपाकर रखा गया 327.700 किलोग्राम सूखा गांजा (कैनाबिस) लावारिस हालत में बरामद किया है।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत: जब्त किए गए इस अवैध गांजे की बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 1 करोड़ 63 लाख 80 हजार रुपये आंकी गई है।
सोनमुरा थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर तपस दास के नेतृत्व में चलाए गए इस विध्वंस और जब्ती अभियान ने ड्रग्स तस्करों के नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है। सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि त्रिपुरा में अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ इस तरह के कड़े अभियान आगे भी जारी रहेंगे।
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