केंद्र सरकार ने देश में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को आर्थिक राहत प्रदान करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने तुअर (अरहर), उड़द और मसूर जैसी प्रमुख दलहन फसलों के प्रमाणित बीजों पर मिलने वाली सब्सिडी को बढ़ाकर सीधे 100 प्रतिशत कर दिया है। इस नीतिगत बदलाव से किसानों को प्रति क्विंटल अधिकतम ₹12,000 तक की वित्तीय सहायता प्राप्त होगी।
महाराष्ट्र के पत्र के बाद नियमों में संशोधन
यह महत्वपूर्ण निर्णय 'दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' के तहत लिया गया है। इस साल जुलाई में महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर बीज सब्सिडी को 50% से बढ़ाकर 100% करने का विशेष आग्रह किया था। उनका तर्क था कि बीजों की ऊंची कीमतों के कारण कई किसान प्रमाणित बीजों का उपयोग करने से कतराते हैं, जिससे कुल पैदावार पर असर पड़ता है। इसी मांग को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने 28 अगस्त को नए और संशोधित दिशानिर्देश जारी कर दिए।
नई सब्सिडी दरें और श्रेणियां
नई व्यवस्था के तहत बीजों की आयु और किस्म के आधार पर सब्सिडी का निर्धारण किया गया है:
नई किस्में (पिछले 5 साल के भीतर जारी):
तुअर, उड़द और मसूर: 100% तक सब्सिडी, अधिकतम सीमा ₹12,000 प्रति क्विंटल।
चना और अन्य दलहन: 75% तक सब्सिडी, अधिकतम सीमा ₹6,000 प्रति क्विंटल (जो भी कम हो)।
पुराने किस्में (5 से 10 साल पुरानी):
तुअर, उड़द और मसूर: 75% तक सब्सिडी, अधिकतम सीमा ₹9,000 प्रति क्विंटल।
चना और अन्य दलहन: 50% तक सब्सिडी, अधिकतम सीमा ₹4,000 प्रति क्विंटल।
रबी सीजन में चना बोने वाले किसानों के लिए सुनहरा मौका
यह संशोधित प्रावधान 28 अगस्त 2026 से लागू हो चुके हैं और यह दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (2026-27 से 2030-31) का हिस्सा हैं। चूंकि देश के अधिकांश हिस्सों में रबी सीजन की बुवाई का समय आ चुका है, इसलिए चना और अन्य दलहन फसलें बोने वाले किसानों के लिए यह बढ़ी हुई सब्सिडी का लाभ उठाने का बिल्कुल सही समय है। इसके अलावा, खेतों की सटीक पैमाइश के लिए ‘कृषि मैपर’ तकनीक के इस्तेमाल पर प्रति हेक्टेयर ₹30 की अतिरिक्त सहायता भी जोड़ी गई है।
प्रमाणित बीजों के लाभ और उद्देश्य
उत्पादन में वृद्धि: प्रमाणित और नई किस्मों के बीजों में कीट व रोगों से लड़ने की क्षमता अधिक होती है, जिससे पैदावार बेहतर होती है।
बीमारियों से बचाव: पुराने घरेलू बीजों में समय के साथ उपज क्षमता घट जाती है, जबकि प्रमाणित बीज बीज-जनित बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम करते हैं।
आयात पर निर्भरता कम करना: इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश में तुअर, उड़द, मसूर, चना और मूंग का उत्पादन बढ़ाकर विदेशों से इनके आयात पर निर्भरता को खत्म करना है।
किसान भाई अपने नजदीकी जिला कृषि विभाग या सहकारी समितियों के माध्यम से इन प्रमाणित बीजों के लिए आवेदन कर सकते हैं और इस योजना का पूरा लाभ उठा सकते हैं।
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