नई दिल्ली में आयोजित एक तिरंगा मार्च के दौरान उपजे तनाव और राजनीतिक हंगामे ने राष्ट्रीय राजधानी से लेकर पश्चिम बंगाल तक सियासी पारा चढ़ा दिया है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अब तक 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा चुका है। हालांकि, हिरासत में लिए गए इन लोगों की सटीक पहचान और उन्हें कहां रखा गया है, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।

इस पूरी कार्रवाई के केंद्र में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक एवं राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके की हिरासत है। पुलिस ने उन्हें कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क पहुंचने से पहले ही एहतियातन हिरासत में ले लिया, जब वे एनसीपी-एससीपी के प्रवक्ता अनीश गावंडे के आवास के बाहर अकेले पैदल जा रहे थे। इस दौरान उनके पास केवल राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा था और उनके साथ कोई भीड़ या उग्र प्रदर्शन नहीं था।

'अगर तिरंगा भारत में नहीं फहराएंगे, तो क्या पाकिस्तान में?' - अरविंद केजरीवाल

इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "अगर हम भारत में तिरंगा नहीं फहराएंगे, तो क्या पाकिस्तान में फहराएंगे?"

केजरीवाल ने आगे कहा कि जिन लोगों को भारतीय तिरंगे से परेशानी है, उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी को उन्होंने "खुली तानाशाही" करार दिया और सवाल किया कि क्या आज के समय में देश के भीतर तिरंगा फहराना भी एक अपराध बन गया है? उन्होंने तंज कसते हुए यह भी आरोप लगाया कि अभिजीत की गिरफ्तारी इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे कितना डरते हैं।

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'यह एक अघोषित आपातकाल है' - ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए सवाल उठाया कि दिल्ली पुलिस आखिर कर क्या रही है?

ममता बनर्जी ने तीखे शब्दों में कहा, "अभिजीत दीपके को सिर्फ इसलिए हिरासत में लिया गया क्योंकि उन्होंने भारतीय तिरंगा थाम रखा था। जरा सोचिए, आजाद भारत में हमारे युवाओं को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का शांतिपूर्ण तरीके से इस्तेमाल करने के लिए हिरासत में लिया जा रहा है।" उन्होंने इसे "अघोषित आपातकाल" बताते हुए कहा कि जो सरकार असहमति से डरती है, वह पूरी एक पीढ़ी को डरा-धमकाकर चुप कराने का प्रयास कर रही है। यह फासीवादी रवैया किसी भी स्वतंत्र आवाज को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है।

अभिजीत, आशुतोष और सौरव जैसे युवाओं के साहस की सराहना करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि आप किसी की आवाज दबाकर पूरी पीढ़ी को चुप नहीं करा सकते। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "आपकी दीदी पूरी मजबूती से आपके साथ खड़ी हैं। कोई भी धमकी या सत्ता का दुरुपयोग लोकतंत्र की भावना को नहीं कुचल सकता। जागो, भारत!"

सीजेपी की प्रेस रिलीज में सामने आया सच

घटना के बाद जारी प्रेस रिलीज के माध्यम से स्पष्ट किया गया कि अभिजीत दीपके पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने जा रहे थे। इस अचानक हुई कार्रवाई ने देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छेड़ दी है।

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