धमतरी छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में धान की फसल इस समय बालियां बनने और दाना भरने के सबसे महत्वपूर्ण चरण में है। लेकिन, सितंबर महीने की नमी और उमस भरे मौसम के कारण खेतों में तना छेदक, भूरा फुदका (ब्राउन प्लांट हॉपर) और ब्लास्ट जैसे हानिकारक कीटों व रोगों का प्रकोप बढ़ने लगा है। कृषि विभाग धमतरी ने किसानों की उपज को नुकसान से बचाने के लिए एक सामयिक सलाह जारी कर नियमित निगरानी और सही दवाओं के इस्तेमाल की अपील की है।
प्रमुख कीट-रोगों के लक्षण
- तना छेदक: पौधों की बीच की कोंपल सूख जाती है और 'डेड हार्ट' की स्थिति बनती है, जिससे बालियां नहीं निकल पातीं।
- भूरा फुदका: तने से रस चूसकर पौधों को सुखा देता है, जिससे खेत में गोल घेरे में फसल गिरने लगती है।
- पत्ता लपेटक व पेनिकल माइट: पत्ता लपेटक पत्तियों को सफेद धारीदार बना देता है, वहीं पेनिकल माइट के हमले से बालियों के दाने काले पड़कर खराब हो जाते हैं।
- ब्लास्ट व जीवाणु झुलसा: ब्लास्ट में पत्तियों और बालियों की गर्दन पर धब्बे बनते हैं, जबकि जीवाणु झुलसा रोग में पत्तियां किनारों से पीली होकर सूखती हैं।
अनुशंसित दवाएं और प्रति एकड़ मात्रा
कृषि विभाग ने किसानों की सुविधा के लिए कीट व रोगानुसार निम्नलिखित दवाओं के छिड़काव की सलाह दी है:
| कीट / रोग का नामअनुशंसित दवाप्रति एकड़ मात्रा | ||
| तना छेदक व भूरा फुदका | कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4% (दानेदार) | 10 किलोग्राम |
| तना छेदक (वैकल्पिक) | क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.4% SC | 60 मिलीलीटर |
| भूरा फुदका | इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL | 50 मिलीलीटर |
| ब्लास्ट रोग | ट्राइसाइक्लाजोल 75% WP | 120 ग्राम |
छिड़काव के लिए कृषि विशेषज्ञों की अहम सलाह
- समय का ध्यान रखें: दवा का छिड़काव हमेशा सुबह या शाम के ठंडे वातावरण में ही करें।
- पानी का प्रबंधन: छिड़काव से पहले खेत से अतिरिक्त पानी निकाल लें। बारिश की संभावना होने पर छिड़काव न करें।
- संतुलित उर्वरक: नाइट्रोजन (यूरिया) का अत्यधिक उपयोग करने से बचें, क्योंकि इससे पौधे कीटों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
- सुरक्षा उपाय: छिड़काव के दौरान दस्ताने, मास्क और पूरी बांह के कपड़े अवश्य पहनें।
जिले के कृषि अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि किसी भी प्रकार का भ्रम होने पर तुरंत अपने स्थानीय कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सलाह लें, ताकि सही समय पर फसल का बचाव किया जा सके।





