पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के ऐलान के बाद सूबे का राजनीतिक पारा एक बार फिर चढ़ गया है। मुख्य विपक्षी दल के नेता सुवेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद से ही यह सवाल सुर्खियों में है कि क्या तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर नंदीग्राम के सियासी मैदान में उतरेंगी?
तृणमूल के बागी गुट के बड़े बयान और पार्टी के अंदरूनी रुख ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।
1. बागी गुट का बड़ा ऑफर: ‘ममता लड़ेंगी तो नहीं उतारेंगे प्रत्याशी’
नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर सबसे बड़ा मोड़ TMC के बागी नेता और विधायक अखरूर जमान के बयान से आया है:
- ममता का रिकॉर्ड: जमान ने कहा कि ममता बनर्जी का उपचुनाव जीतने का रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है, इसलिए उन्हें नंदीग्राम से मैदान में उतरना चाहिए।
- सहमति का वादा: उन्होंने स्पष्ट ऐलान किया कि यदि ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का फैसला करती हैं, तो उनका बागी गुट उनके खिलाफ अपना कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं करेगा।
2. रेजीनगर सीट का गणित और हुमायूं कबीर का कदम
इससे पहले 'जनता उन्नयन पार्टी' के प्रमुख हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी के लिए रेजीनगर सीट खाली करने और उन्हें समर्थन देने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक कबीर ने अब अपने बेटे को रेजीनगर से उम्मीदवार बना दिया है। इस वजह से ममता के रेजीनगर से चुनाव लड़ने की संभावनाएं बेहद धुंधली हो गई हैं और पूरा ध्यान नंदीग्राम पर केंद्रित हो गया है।
3. नंदीग्राम सीट का इतिहास और राजनीतिक समीकरण
नंदीग्राम सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में हमेशा से हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मानी जाती रही है:
| पहलूविवरण | |
| उपचुनाव की तारीख | 9 अक्टूबर |
| सीट खाली होने का कारण | सुवेंदु अधिकारी का इस्तीफा |
| 2021 का मुकाबला | 2021 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को कड़े मुकाबले में हराया था। |
| 2026 के चुनाव का संदर्भ | 2026 के आम विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट से सुवेंदु अधिकारी के हाथों 15,000 से अधिक वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। |
4. तृणमूल कांग्रेस (TMC) का क्या है रुख?
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने कहा कि प्रत्याशियों के नाम पर अभी कोई अंतिम मुहर नहीं लगी है:
"नंदीग्राम और रेजीनगर में कौन चुनाव लड़ेगा, इसका अंतिम फैसला खुद ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व करेगा। ममता बनर्जी खुद चुनाव मैदान में उतरेंगी या किसी अन्य कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाएंगी, यह जल्द ही साफ हो जाएगा।"
सुवेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने और बागी गुट के ममता के खिलाफ प्रत्याशी न उतारने के वादे के बाद, अब गेंद पूरी तरह से TMC नेतृत्व के पाले में है। नंदीग्राम का यह उपचुनाव तय करेगा कि बंगाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।





