काठमांडू। हिमालयी देश नेपाल में पिछले चार दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़, भूस्खलन और बिजली गिरने (वज्रपात) की अलग-अलग घटनाओं में अब तक कम से कम 21 लोगों की जान जा चुकी है। प्राकृतिक आपदा के कारण सैकड़ों घर जमींदोज हो गए हैं और मुख्य राजमार्गों पर मलबा आने से देश का यातायात नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
गंभीर हालात को देखते हुए आपातकालीन राहत टीमों ने मुस्तैदी दिखाते हुए अब तक 1,284 से अधिक प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।
पाल्पा में भूस्खलन से मकान ढहा, 5 की मौत
ताजा घटनाक्रम में पाल्पा जिले के माथागढ़ी में शनिवार देर रात एक भीषण भूस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में आकर एक रिहाइशी मकान पूरी तरह दब गया। इस हादसे में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत हो गई। देश के अलग-अलग हिस्सों में भूस्खलन, बाढ़ और वज्रपात से पिछले चार दिनों में हुई मौतों का आंकड़ा बढ़कर 21 हो गया है।
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नारायणी (गंडक) नदी उफान पर, विशेष रेड अलर्ट जारी
लगातार हो रही बारिश के कारण दक्षिणी चितवन और नवलपरासी जिलों में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। यहाँ नारायणी नदी (जिसे भारत में प्रवेश करने पर गंडक नदी के नाम से जाना जाता है) खतरे के 9 मीटर के निशान को पार कर गई है और तटीय बस्तियों में पानी घुसना शुरू हो गया है।
नेपाल के जलविज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए विशेष बाढ़ की चेतावनी (Red Alert) जारी की है।
भारत (बिहार) के सीमावर्ती इलाकों पर भी असर की आशंका
नारायणी नदी में आए इस उफान का सीधा असर भारत के सीमावर्ती राज्य बिहार के निचले इलाकों पर भी पड़ सकता है। नवलपरासी और चितवन भारत की सीमा से सटे हुए हैं, ऐसे में वाल्मीकिनगर बैराज और गंडक नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित बढ़ोतरी को लेकर भारतीय प्रशासन को भी सतर्क रहने की आवश्यकता जताई जा रही है।
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पिछले माह की त्रासदी से अभी उबर भी नहीं पाया था देश
उल्लेखनीय है कि नेपाल अभी पिछले महीने (अगस्त) आई उस विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के जख्मों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था, जिसमें 1,453 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और 5,000 से अधिक लोग लापता हो गए थे। एक बार फिर मौसम के तल्ख तेवरों ने नेपाल की जनता और प्रशासन के सामने राहत एवं बचाव कार्यों की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।





