पटना:

बिहार की राजधानी पटना में सोमवार को दरोगा भर्ती परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर देखने को मिला। 1799 पदों पर चल रही बहाली की रद्द की गई मुख्य (मेंस) परीक्षा को बहाल करने की मांग को लेकर हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए। मुख्यमंत्री आवास घेरने निकले प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

गांधी मैदान से शुरू हुआ मार्च, जेपी गोलंबर पर पुलिस से झड़प

सुबह करीब 11:30 बजे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी गांधी मैदान में एकत्र हुए और वहां से जेपी गोलंबर की ओर मार्च निकाला।

  • बैरिकेडिंग तोड़ी: सुरक्षा के मद्देनजर पटना पुलिस ने जेपी गोलंबर पर भारी बैरिकेडिंग कर अभ्यर्थियों को रोकने की कोशिश की। हालांकि, उग्र अभ्यर्थियों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी और मुख्यमंत्री आवास तथा डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ने लगे।
  • पुलिस की लाठीचार्ज: स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठियां भांजीं। इसके बाद अफरा-तफरी मच गई और ट्रैफिक पूरी तरह बाधित हो गया।
  • प्रशासन की अपील: पटना जिला प्रशासन ने अभ्यर्थियों से यातायात बाधित न करने और अपना एक प्रतिनिधिमंडल बनाकर सरकार से बातचीत करने की अपील की है।

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अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें और आक्रोश का कारण

  1. मेंस परीक्षा रद्द करने का विरोध: अभ्यर्थियों का कहना है कि वे प्रारंभिक परीक्षा के बाद मेंस में सफल हुए थे और लगभग 10,000 अभ्यर्थियों का परिणाम जारी किया जा चुका था। लेकिन बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने कुछ शिकायतों के आधार पर पूरी मेंस परीक्षा ही रद्द कर दी, जो उनके साथ अन्याय है।
  2. "गड़बड़ी जहां हुई, सजा वहां मिले": अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि किसी सेंटर पर धांधली हुई है, तो उसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। पूरे राज्य की परीक्षा रद्द करना ठीक वैसा ही है जैसे 1-2 बूथों पर गड़बड़ी के लिए पूरा चुनाव रद्द कर देना।
  3. शारीरिक परीक्षा की तारीख जारी हो: सफल अभ्यर्थी पिछले 4 महीनों से शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) की तैयारी कर रहे हैं। अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप कर रद्द करने का फैसला वापस लेने और जल्द से जल्द शारीरिक परीक्षा की तारीख घोषित करने की मांग की है।
  4. उम्र सीमा और आर्थिक संकट: कई अभ्यर्थियों की उम्र सीमा खत्म होने की कगार पर है। लंबे समय से पटना में रहकर तैयारी कर रहे युवाओं के सामने अब आर्थिक और मानसिक संकट खड़ा हो गया है।

अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि जब तक सरकार और आयोग उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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