नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया के बाद उठे विवादों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। चुनाव आयोग (ECI) द्वारा 18 सितंबर 2026 को उच्चतम न्यायालय में दाखिल हलफनामे के अनुसार, SIR के तहत जारी आदेशों के खिलाफ 38,20,683 अपीलें दर्ज कराई गई हैं, जिनमें से 97.3% यानी 37,18,452 अपीलें अभी भी लंबित हैं।

धीमी रफ्तार और गणितीय अनुमान: क्या जून 2042 तक चलेगा निपटारा?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित 19 अपीलीय ट्रिब्यूनलों ने 13 अप्रैल 2026 से कार्य करना शुरू किया था। पिछले लगभग 158 दिनों (18 सितंबर तक) के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो:

  • प्रतिदिन निपटारे की औसत दर: 1,02,231 मामलों का निपटारा ÷ 158 दिन = ~647 अपील प्रतिदिन।
  • समय का अनुमान: मौजूदा रफ्तार से बाकी बची 37,18,452 अपीलों को निपटाने में लगभग 5,750 दिन (15 साल 9 महीने) लग सकते हैं। गणितीय आधार पर यह प्रक्रिया जून 2042 तक खिंच सकती है।

हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त ट्रिब्यूनलों के गठन, मानव संसाधन बढ़ाने और प्राथमिकता तय करने से वास्तविक समय में काफी कमी आ सकती है।

SIR प्रक्रिया का सांख्यिकी विवरण (18 सितंबर 2026 तक)

मद / विवरणआंकड़े
कुल दर्ज अपीलें38,20,683
निपटाई गई कुल अपीलें1,02,231 (लगभग 2.7%)
लंबित अपीलों का स्टॉक37,18,452 (लगभग 97.3%)
कार्यरत अपीलीय ट्रिब्यूनल19
नए Form 6 आवेदन (17 दिसं 2025 – 7 अग 2026)34.13 लाख

83 हजार फैसलों में 75 हजार नाम गलत तरीके से काटे जाने का दावा

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन के अनुसार, अब तक ट्रिब्यूनल द्वारा जिन 83,000 मामलों में अंतिम फैसला सुनाया गया है, उनमें से लगभग 75,000 मामलों में नाम काटना गलत पाया गया है। कुल 38 लाख मामलों में से लगभग 31 लाख अपीलें नाम हटाए जाने के खिलाफ हैं, जबकि 7 लाख अपीलें नाम बनाए रखने या हटाने की आपत्तियों से जुड़ी हैं।

राजनीतिक दृष्टिकोण से, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने ध्यान दिलाया है कि राज्य की 31 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर SIR प्रक्रिया में काटे गए मतदाताओं के नाम से कम है।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: समयबद्ध और प्राथमिकता आधारित निपटारा

सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है कि इतनी बड़ी पेंडेंसी से निपटने के लिए क्या सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं और कितने अतिरिक्त ट्रिब्यूनल स्थापित किए जाने की आवश्यकता है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर किए गए हैं और उन्होंने अपने मताधिकार को बचाने के लिए अपील की है, उनके मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर की जानी चाहिए।