पूर्वांचल सूर्य संवाददाता, पाकुड़।सदर प्रखंड के सोनाजोड़ी पंचायत अंतर्गत मटियापहाड़ में 5 करोड़ वर्ष पुराना जीवाश्मों का अकूत खजाना मिला है,जिससे वैज्ञानिकों में काफी उत्साह देखा जा रहा है और यह 5 करोड़ वर्ष पुराना जीवाश्म एक शोध का विषय बनता जा रहा है।मटियापहाड़ में जीवाश्म यत्र- तत्र बिखरे पड़े है जो खुलेआम देखा जा सकता है।





शोध में लगे वैज्ञानिकों के अनुसार 5 करोड़ वर्ष पूर्व कार्बोनिफेरस और परमीयन काल में ऑस्ट्रेलिया,यूरोप, अंटार्कटिका और एशिया को मिलाकर एक सुपर महाद्वीप का निर्माण हुआ करता था,जिसे भूवैज्ञानिक भाषा में गोंडवाना लैंड कहा जाता है।उस समय जलवायु नम और गर्म था। वायुमंडल में बदलाव के कारण भयंकर ज्वालामुखी विस्फोट से यह महाद्वीप कई टुकड़ों में विभाजित हो गया था। ज्वालामुखी विस्फोट से निकले लावा से पेड़ पौधे और विभिन्न जीव ढक गए और इन्हीं पेड़ पौधे और विभिन्न जीव के अवशेष को आज जीवाश्म के रूप में देखा जा रहा है। इन जीवाश्मों के शोध से वायुमंडल में बदलाव, प्राकृतिक घटना, जलवायु परिवर्तन, पृथ्वी की उत्पत्ति सहित कई विषयों पर पर्दा उठ सकता है या जानकारी मिल सकती है। पर्यावरणविद के अनुसार जीवाश्मों से भरे इस पहाड़ को अंतरराष्ट्रीय धरोहर के रूप में संरक्षित कर शोध किया जाना चाहिए। बता दें कि इस शोध कार्य में पाकुड़ के वन प्रमंडल पदाधिकारी सौरभ चंद्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।