बिहार विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के दौरान राज्य की सियासत का पारा एक बार फिर सातवें आसमान पर है। बाहुबली नेता अनंत सिंह और जदयू के वरिष्ठ नेता नीरज कुमार के बीच छिड़ी जुबानी जंग ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। हाल ही में अनंत सिंह के एक बयान— जिसमें उन्होंने जदयू के लिए "नौ लोगों के मर्डर और खुद को गोली लगने" की बात कही थी— पर सियासी भूचाल आ गया था। अब इस पूरे विवाद पर अनंत सिंह ने अपनी सफाई पेश की है।
क्या था पूरा विवाद और अनंत सिंह का नया बयान?
अनंत सिंह इन दिनों एमएलसी चुनाव में जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर प्रचार कर रहे हैं। जब उनसे यह सवाल किया गया कि उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए घेरा जा रहा है, तो उन्होंने अपने पुराने संघर्षों को याद करते हुए तीखा पलटवार किया।
शुक्रवार को अपनी सफाई में अनंत सिंह ने स्पष्ट किया:
"मैंने नीरज कुमार को जवाब दिया है कि मैंने कितनी कुर्बानी दी है। जब लालू यादव की सरकार थी, तब हमारे 9 लोग मरवा दिए गए और मुझे भी गोली लगी। हम नीतीश कुमार के साथ खड़े हुए, इसलिए लालू यादव ने ऐसा करवाया। हमारी बहुत बड़ी क्षति हुई है और इस तनाव के बीच मेरे पिता की भी दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।"
अनंत सिंह ने आगे कहा कि नीतीश कुमार जब भी संकट में थे और लालू प्रसाद यादव से अलग हुए थे, तब वे मदद के लिए उनके पास आए थे। उन्होंने दावा किया कि जदयू और नीतीश कुमार के प्रति उनकी निष्ठा अटूट रही है और उनके पास 3 लाख वोटों का मजबूत समर्थन है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, "मेरी दुश्मनी न तो जदयू से है और न ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से, इस दुनिया में सिर्फ नीरज कुमार ही मेरे दुश्मन हैं।"
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निशांत कुमार की प्रचार पर भी छिड़ी रार
विवाद सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। इससे पहले अनंत सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सलाह दी थी कि उन्हें नीरज कुमार के पक्ष में प्रचार करने नहीं जाना चाहिए, क्योंकि यह कोई औपचारिक पार्टी चुनाव नहीं है।
इस बयान पर पलटवार करते हुए जदयू नेता नीरज कुमार ने तीखा रुख अपनाया था। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा था कि अनंत सिंह कौन होते हैं जो निशांत कुमार को सलाह दें? नीरज कुमार ने निशांत को नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत से जोड़ते हुए कहा था कि उन्हें किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है और वे एक मंत्री के रूप में शानदार कार्य कर रहे हैं।
राजनीतिक मायने
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच की यह तल्खी आने वाले चुनावों में समीकरणों को किस तरह प्रभावित करती है, यह देखने वाली बात होगी। एक तरफ जहां अनंत सिंह अपनी पुरानी कुर्बानियों और व्यक्तिगत प्रभाव का हवाला दे रहे हैं, वहीं जदयू नेतृत्व इस घमासान से दूरी बनाते हुए संगठन को एकजुट रखने की कोशिश में जुटा है।





