नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2026 को दिल्ली के यशोभूमि में तीन दिवसीय ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ का भव्य उद्घाटन किया। 17 से 19 सितंबर तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का विषय ‘सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम’ रखा गया है। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी सेमीकंडक्टर यात्रा के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है और देश ने महज चार वर्षों में वह उपलब्धि हासिल की है, जिसे पूरा करने में दुनिया को औसतन एक दशक का समय लगता है।
सेमीकॉन 2.0: ₹1,27,500 करोड़ के बजट को मंजूरी
भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने के लिए केंद्र सरकार ने सेमीकॉन 2.0 योजना के तहत ₹1,27,500 करोड़ का बजट मंजूर किया है। इससे पहले 2021 में शुरू की गई सेमीकॉन 1.0 (₹76,000 करोड़) के तहत 12 यूनिट्स मंजूर हुई थीं, जिनमें से 5 यूनिट्स ने उत्पादन भी शुरू कर दिया है।
- 2.0 का मुख्य फोकस: यह बजट संपूर्ण चिप वैल्यू चेन—जैसे चिप डिजाइनिंग, मशीनरी, नए फैब (Fab) निर्माण, पैकेजिंग, रिसर्च (R&D) और टैलेंट डेवलपमेंट पर केंद्रित होगा।
- डिजाइन में उपलब्धि: डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव के तहत 24 प्रोजेक्ट्स मंजूर किए जा चुके हैं और 1 लाख से अधिक इंजीनियरों को उन्नत डिजाइन टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं।
भारत के लिए क्यों जरूरी है आत्मनिर्भर चिप निर्माण?
सेमीकंडक्टर आज के आधुनिक दौर की नींव हैं। स्मार्टफोन, कंप्यूटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G/6G, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), डिफेंस सिस्टम और डेटा सेंटर्स बिना चिप के काम नहीं कर सकते।
- वैश्विक सप्लाई चेन का खतरा: वर्तमान में दुनिया के 60% से अधिक चिप्स और करीब 90% एडवांस्ड चिप्स का निर्माण अकेला ताइवान करता है। भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन की बाधाओं को देखते हुए दूसरे देशों पर निर्भरता जोखिम भरी है।
- आर्थिक व सामरिक सुरक्षा: घरेलू स्तर पर चिप बनाने से आयात पर निर्भरता कम होगी, राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी, लाखों उच्च-स्तरीय रोजगार सृजित होंगे और भारत तकनीकी रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा।
मोहाली की सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला पहले ही चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 जैसे ऐतिहासिक मिशनों के लिए स्वदेशी चिप्स बनाकर अपनी क्षमता साबित कर चुकी है। सेमीकॉन 2.0 के जरिए भारत अब वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार का नेतृत्व करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।





