नई दिल्ली/कोलकाता।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद पार्टी के भीतर शुरू हुआ आंतरिक घमासान अब एक बड़े कूटनीतिक और कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खेमे और बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुट के बीच असली TMC और उसके 'फूल और घास' वाले चुनाव चिह्न पर मालिकाना हक की लड़ाई जारी है। चुनाव आयोग (ECI) के निर्देश पर दोनों ही गुटों ने अपनी-अपनी पसंद के तीन नाम और तीन फ्री सिंबल के विकल्प आयोग को सौंप दिए हैं।
ममता बनर्जी गुट की ओर से भेजे गए विकल्प
ममता बनर्जी खेमे ने चुनाव आयोग को ईमेल के जरिए अपने संभावित नाम और सिंबल की सूची भेजी है। बागी गुट से अलग पहचान कायम रखते हुए मूल पार्टी से जुड़ाव दर्शाने का प्रयास किया गया है:
- पार्टी नाम के विकल्प:
- तृणमूल ममता कांग्रेस
- ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (ममता)
- तृणमूल कांग्रेस (M)
- चुनावी सिंबल के विकल्प:
- फुटबॉल
- प्रार्थना (जुड़े हुए हाथ)
- क्रिकेट बैट ('खेला होबे' स्लोगन के साथ)
विवाद की जड़: चुनाव हार और बागी नेताओं का दावा
राज्य विधानसभा चुनावों में TMC की हार के बाद पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर सवाल उठने लगे। ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में दर्जनों विधायकों ने मौजूदा नेशनल वर्किंग कमेटी के कार्यकाल को अमान्य बताते हुए बागी रुख अपना लिया।
| घटनाक्रम | विवरण |
| विवाद का कारण | बागी गुट का तर्क है कि Feb 2022 में बनी वर्किंग कमेटी का 3 साल का कार्यकाल Feb 2025 में समाप्त हो गया था। |
| बागी गुट का कदम | 22 जून को हुई बैठक में अरूप रॉय को नेशनल वर्किंग कमेटी का चेयरपर्सन चुना गया और खुद को असली TMC बताया गया। |
| ममता खेमे का तर्क | ममता समर्थकों के अनुसार बागी गुट ने पार्टी संविधान की गलत व्याख्या की है और यह प्रक्रिया अवैध है। |
चुनाव आयोग का अंतरिम फैसला
नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को फैसला सुनाया:
- मूल नाम व सिंबल फ्रीज: फिलहाल दोनों में से कोई भी पक्ष "ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस" नाम और "फूल व घास" (Flowers and Grass) आरक्षित सिंबल का प्रयोग नहीं कर सकेगा।
- अंतरिम व्यवस्था: यह व्यवस्था केवल वर्तमान उपचुनावों तक ही सीमित है ताकि दोनों पक्षों के हितों की रक्षा हो सके।
- अंतिम निर्णय लंबित: सिंबल ऑर्डर (1968) के 'पैरा 15' के तहत असली TMC कौन है, इसका फैसला बाद में विस्तृत सुनवाई के बाद तय किया जाएगा।





