बीजापुर (छत्तीसगढ़): कभी नक्सलियों के अभेद्य गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाले बीजापुर जिले के तर्रेम क्षेत्र में अब शांति, विकास और विश्वास की नई बयार बह रही है। आगामी 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) की तैयारियों को लेकर थाना तर्रेम पुलिस ने आत्मसमर्पित (सरेंडर) कर चुके माओवादियों और स्थानीय ग्रामीणों के साथ एक विशेष समन्वय बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में पुलिस प्रशासन ने मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों से समाज के साथ मिलकर हर्षोल्लास और राष्ट्रप्रेम की भावना के साथ आजादी का पर्व मनाने की अपील की।
लाल आतंक के गढ़ में लहराएगा तिरंगा
जिन इलाकों में कभी नक्सलियों के फरमान और खौफ के कारण स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराना या जश्न मनाना नामुमकिन माना जाता था, वहां अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। बैठक में मौजूद आत्मसमर्पित माओवादियों ने पुलिस अधिकारियों को आश्वस्त किया कि वे इस बार शांति, सुरक्षा और सम्मानजनक माहौल के बीच समाज के साथ मिलकर 15 अगस्त का जश्न मनाएंगे।
पुलिस अधिकारियों ने बैठक के दौरान कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ना ही एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य का मार्ग है।
पुनर्वास और आत्मनिर्भरता पर जोर
बैठक के दौरान पुलिस अधिकारियों ने पुनर्वासित माओवादियों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी और पुनर्वास योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जी सकें।
- सतत मॉनिटरिंग और सहयोग: पुलिस थाना स्तर पर सरेंडर कर चुके माओवादियों की लगातार मॉनिटरिंग कर रही है, ताकि उन्हें समाज में सही ढंग से पुनर्स्थापित करने में कोई बाधा न आए और आवश्यक मार्गदर्शन मिलता रहे।
- असामाजिक तत्वों पर नजर: पुलिस ने ग्रामीणों और पूर्व माओवादियों से अपील की है कि वे क्षेत्र में सक्रिय संदिग्ध गतिविधियों और असामाजिक तत्वों के बारे में तत्काल पुलिस को सूचित करें।
बस्तर में मजबूत होता प्रशासन पर विश्वास
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि बीजापुर और पूरे बस्तर क्षेत्र में माओवाद के प्रभाव में आ रही भारी कमी के बाद आम लोगों का शासन और सुरक्षा बलों पर भरोसा बढ़ा है। ग्रामीणों के सक्रिय सहयोग से अब बस्तर धीरे-धीरे शांति, सद्भाव और विकास की मुख्यधारा से मजबूती से जुड़ रहा है।





