भोपाल/बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में फैली बीमारी के प्रकोप पर राज्य सरकार ने त्वरित और बहु-स्तरीय कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को सख्त और जरूरी दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि सरकार जनता के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और बालाघाट के हालात पर गंभीरता से काम किया जा रहा है।

जुलाई के दूसरे सप्ताह में जिले के बिरसा विकासखंड के बोंदारी, कुंडेकसा, कोरका, डंडेकसा और सोनगुड्डा क्षेत्रों में बच्चों में बुखार और दाने की शिकायतें मिली थीं। इसके तुरंत बाद दुर्गम इलाकों और भारी बारिश के बीच मेडिकल टीमें राहत-बचाव के लिए मैदान में उतर गईं।

ग्राउंड जीरो पर त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं प्रशासन ने तत्काल डिस्ट्रिक्ट रैपिड रिस्पॉन्स टीम (DRRT) को सक्रिय किया। राष्ट्रीय व राज्य स्तर के बाल रोग विशेषज्ञों, महामारी वैज्ञानिकों और कीट वैज्ञानिकों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।

  • स्वास्थ्य जांच एवं उपचार: 57 विशेषज्ञ स्वास्थ्य दलों ने 50 गांवों में 43,451 लोगों की जांच की। 6,537 लोगों का घर पर ही इलाज किया गया, जबकि 647 गंभीर बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
  • टीकाकरण व रोकथाम: बिरसा विकासखंड के 35,827 बच्चों को खसरा-रूबेला का टीका लगाया गया।
  • ओआरएस व मलेरिया नियंत्रण: 1.63 लाख से अधिक परिवारों को ओआरएस और जिंक बांटे गए। 26,865 लोगों की मलेरिया जांच में 980 संक्रमितों का तत्काल इलाज शुरू किया गया तथा 3,600 मच्छरदानियां बांटी गईं।

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वित्तीय प्रावधान और ढांचागत मजबूती स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने बड़े बजट को मंजूरी दी है:

  • गर्भवती महिलाओं और बच्चों के परिवहन के लिए 3.60 लाख रुपये और टीकों के सुरक्षित परिवहन हेतु 3.40 लाख रुपये आवंटित।
  • 22 उप-स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत हेतु 1.93 करोड़ रुपये तथा आवश्यक उपकरणों की खरीद के लिए 24 लाख रुपये स्वीकृत।
  • घुम्मुर उप-स्वास्थ्य केंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में बदलने का 66 लाख रुपये का प्रस्ताव मंत्रिमंडल को भेजा गया।
  • जिले में 54 नए डॉक्टरों, 4 नए CDPO और 52 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की तुरंत नियुक्ति की गई।

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23 वर्षों में बालाघाट की ऐतिहासिक स्वास्थ्य प्रगति (2003 बनाम 2026) राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय टीमों के समन्वय से दूषित जल, अंधविश्वास और झोलाछाप डॉक्टरों जैसी चुनौतियों पर काबू पाया गया। पिछले दो दशकों में बालाघाट जिले ने स्वास्थ्य सूचकांकों में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया है:

  • संस्थागत प्रसव: वर्ष 2003 के 21.50% से बढ़कर वर्ष 2026 में 92.10% पहुंचा।
  • सुरक्षित प्रसव: 41.50% से बढ़कर 94.10% हुआ।
  • पूर्ण टीकाकरण: 47.50% से बढ़कर 92.70% तक पहुंचा।
  • मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी: 2003 में जहां प्रतिवर्ष लगभग 176 मातृ मृत्यु और 3,805 शिशु मृत्यु के मामले आते थे, वहीं 2026 में यह घटकर क्रमशः 60 और 1,560 रह गए हैं। बीते 23 वर्षों में जिले में लगभग 2,650 माताओं और 51,600 शिशुओं की जान बचाई गई है।

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