पटना:
बिहार में मत्स्य पालन (Fisheries) को बढ़ावा देने और किसानों तथा मछुआरों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत 'मत्स्य प्रशिक्षण एवं प्रसार योजना' के माध्यम से राज्य के मत्स्य पालकों, मछुआरों और इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले नए किसानों को पूरी तरह निःशुल्क प्रशिक्षण (Free Training) प्रदान किया जाएगा।
आधुनिक तकनीकों और उन्नत उत्पादन तरीकों की जानकारी देने के लिए राज्यभर में कुल 332 प्रशिक्षण बैच आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में मिलेगा प्रशिक्षण
इस योजना के तहत प्रशिक्षण केवल राज्य के भीतर ही नहीं, बल्कि राज्य के बाहर स्थित देश के प्रतिष्ठित मात्स्यिकी संस्थानों में भी कराया जाएगा:
- यात्रा भत्ता (मार्ग व्यय): राज्य से बाहर प्रशिक्षण प्राप्त करने जाने वाले प्रतिभागियों को आने-जाने का मार्ग व्यय (Travel Allowance) सरकार द्वारा प्रदान किया जाएगा।
- स्थानीय केंद्र: राज्य के अंदर स्थित प्रशिक्षण संस्थानों या केंद्रों में प्रशिक्षण लेने वालों को मार्ग व्यय देय नहीं होगा।
पात्रता (कौन कर सकता है आवेदन?)
इस योजना के अंतर्गत निम्नलिखित लोग आवेदन करने के पात्र होंगे:
- तालाब/जलकर धारक: निजी, पट्टे (Lease) या सरकारी तालाबों में मत्स्य पालन करने वाले व्यक्ति।
- समिति के सदस्य: प्रखंड स्तरीय मत्स्यजीवी सहयोग समिति के सक्रिय सदस्य।
- नए इच्छुक किसान: ऐसे किसान जो बैंक लोन, स्व-लागत या विभागीय योजनाओं के तहत मत्स्य पालन शुरू करने के लिए जिला मत्स्य कार्यालय में पंजीकृत/आवेदित हैं।
चयन प्रक्रिया और निबंधन शुल्क
- पहली बार वालों को प्राथमिकता: चयन में उन किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी जो पहली बार प्रशिक्षण ले रहे हैं। जिन मत्स्य पालकों ने पूर्व में प्रशिक्षण प्राप्त किया है, वे 3 वर्ष की अवधि के बाद ही दोबारा पात्र होंगे।
- रजिस्ट्रेशन शुल्क:
- केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान (CIFE), काकीनाडा के लिए: ₹250
- अन्य सभी प्रशिक्षण संस्थानों के लिए: ₹100
कैसे करें आवेदन?
इच्छुक और पात्र आवेदक बिहार मत्स्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं:
- आधिकारिक पोर्टल: fisheries.bihar.gov.in
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग कर मछली उत्पादन बढ़ाना है, ताकि राज्य के ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की वार्षिक आय में सुधार हो सके।





