ब्रिटेन की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था इस समय गंभीर चुनौतियों के दौर से गुजर रही है। हाल ही में देश की खुफिया एजेंसी MI-5 के प्रमुख केन मैक्कलम ने अपने संबोधन में ब्रिटेन के सामने खड़े सुरक्षा संकटों का कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख दिया है। रूस, ईरान के बढ़ते दखल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों के दुरुपयोग ने वैश्विक शांति और ब्रिटेन की सुरक्षा के लिए नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
रूस बना पश्चिमी देशों के लिए 'नंबर वन एग्रेसर'
एमआई-5 प्रमुख ने रूस को पश्चिमी देशों के लिए सबसे बड़ा खतरा यानी 'एग्रेसर नंबर वन' करार दिया है। मैक्कलम के मुताबिक, रूस खुलेआम युद्ध करने के बजाय साइबर हमलों और छुपकर नुकसान पहुंचाने की रणनीतियों को बढ़ावा दे रहा है ताकि सीधे तौर पर नाटो (NATO) देशों से युद्ध न छिड़े। यूक्रेन संघर्ष के बाद से ब्रिटेन ने रूसी दूतावासों से लगभग 1000 अधिकारियों को निष्कासित किया है, जिसके चलते अब रूस अपनी साजिशों को अंजाम देने के लिए स्थानीय स्वयंसेवकों और अपराधी गिरोहों का सहारा ले रहा है।
ईरान की गतिविधियां और ब्रिटेन पर असर
रूस के साथ-साथ ईरान भी ब्रिटेन के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। ईरान पर आरोप है कि वह ब्रिटेन में अपने विरोधियों, मीडिया संगठनों और विशेष रूप से इजरायली हितों को निशाना बनाने के वास्ते अपराधी गिरोहों का इस्तेमाल कर रहा है। पिछले एक साल में ईरान समर्थित गतिविधियों के चलते 50 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें मुख्य निशाने पर यहूदी समुदाय और सैन्य ठिकाने रहे हैं। हालांकि, ईरान इन सभी आरोपों को खारिज करता आया है।
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AI: साइबर युद्ध और आतंकवाद का नया हथियार
खुफिया एजेंसी के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते दुरुपयोग ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। एआई ने हैकर्स और सुरक्षा एजेंसियों के बीच चल रहे साइबर युद्ध को 'सुपरचार्ज' कर दिया है। हमलावर सटीक प्रोपोगंडा और लोगों को बरगलाने वाली सामग्री तैयार करने में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ ही, आतंकवादियों द्वारा एआई की मदद से खतरनाक बायोवेपन या घातक वायरस विकसित किए जाने की आशंका ने दुनिया भर के विशेषज्ञों को डरा दिया है।
आतंकवाद और कट्टरपंथ का बढ़ता दायरा
ब्रिटेन में राष्ट्रीय आतंकवाद खतरे का स्तर गंभीर बना हुआ है। एमआई-5 प्रमुख ने रेखांकित किया कि पिछले एक साल में एक खतरनाक ट्रेंड यह देखा गया है कि आव्रजन विरोधी और मुस्लिम विरोधी नफरत तेजी से आतंकवादी सोच में बदल रही है। उदाहरण के लिए, दक्षिण-पंथी विचारधारा से प्रभावित कम उम्र के युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर हमलों को अंजाम देने की साजिशों को सुरक्षा एजेंसियों ने नाकाम किया है। इसके अलावा, ब्रेक्सिट जनमत संग्रह (2016) में रूस के संभावित हस्तक्षेप और सोशल मीडिया प्रोपोगंडा के असर को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
यह चेतावनी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आधुनिक युग में पारंपरिक युद्धों से कहीं अधिक अदृश्य और तकनीकी खतरे देशों की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा नासूर बनते जा रहे हैं।
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