संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा दिए गए वक्तव्य पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताते हुए करारा जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने 'राइट टू रिप्लाई' (Right to Reply) का उपयोग करते हुए पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को संरक्षण दिए जाने, दोहरे रवैये और उसके आंतरिक राजनीतिक संकट पर वैश्विक मंच से पाकिस्तान को बेनकाब किया।
9/11 की 25वीं बरसी और लादेन का जिक्र
पेटल गहलोत ने 9/11 हमलों की 25वीं बरसी (2026) का हवाला देते हुए पाकिस्तान के सैन्य ठिकाने के पास छिपे ओसामा बिन लादेन का मुद्दा उठाया:
- उन्होंने कहा कि 9/11 हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तानी सेना की प्रमुख सैन्य अकादमी के ठीक पास एबटाबाद में रह रहा था।
- गहलोत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि पाकिस्तान में जिसे लोग स्वयं 'फॉर्म 47 सरकार' कहते हैं, उससे इससे अलग उम्मीद नहीं की जा सकती।
इसे भी पढ़ेंः पश्चिम एशिया में गहराया संकट: ईरान का 7-दिवसीय प्रस्ताव और डोनाल्ड ट्रम्प का सख्त रुख
पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति और 'सैन्य शासन' पर हमला
भारतीय कूटनीतिज्ञ ने पाकिस्तान में लोकतंत्र और मानवाधिकारों के दावों को पूरी तरह खारिज किया:
- सेना का नियंत्रण: गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान में "सेना की, सेना द्वारा और सेना के लिए" बनी सरकार है। वहां कठपुतली नेता बदलते रहते हैं, लेकिन वास्तविक सत्ता और फैसले सेना के हाथ में ही होते हैं।
- 27वां संविधान संशोधन: पाकिस्तान की सच्चाई उसके 27वें संविधान संशोधन और वहां के वास्तविक शासकों को मिली छूट से जगजाहिर होती है।
- धार्मिक असहिष्णुता व ईशनिंदा कानून: उन्होंने कहा कि धार्मिक सहिष्णुता की बातें करने वाले देश का मुख्य आधार ईशनिंदा (Blasphemy) कानून हैं, और दुनिया जानती है कि वहां अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न किस प्रकार किया जाता है।
जम्मू-कश्मीर और 'पीओके' (PoJK) पर भारत का रुख
जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की:
- अभिन्न अंग: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा।
- पीओके में मानवाधिकार उल्लंघन: गहलोत ने कहा कि यदि कश्मीर पर बात करनी ही है, तो पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) पर होनी चाहिए। उन्होंने रावलकोट में होने वाली हिंसा, अवैध हत्याओं और नागरिकों को बुनियादी अधिकारों से वंचित रखे जाने का मुद्दा उठाया।
इसे भी पढ़ेंः चुनावी साख पर संकट: आंतरिक असहमतियों और फॉर्म-6 विवाद के भंवर में निर्वाचन आयोग
सीमा पार आतंकवाद पर कड़ी चेतावनी
गहलोत ने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए प्रतिबद्ध है:
"हमने दिखाया है कि आतंकवादियों के पास भागने या छिपने की कोई जगह नहीं होगी। हम आतंकवाद के खिलाफ अपना बचाव करने के अधिकार का पूरा इस्तेमाल करेंगे और पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद के गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।"
उन्होंने अंत में कहा कि हर साल झूठ दोहराने से वह सच में नहीं बदल जाता। पाकिस्तान की आतंकवाद, धोखे और दोहरे मापदंडों (Double Standards) की नीतियां न तो उसके अपने हित में हैं और न ही वैश्विक शांति के लिए।





