नई दिल्ली / मॉस्को

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल की आवाजाही प्रभावित होने के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस पर निर्भरता बढ़ाई है। इस संकट के दौरान रूस से भारत को कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति लगभग दोगुनी होकर 2.25 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) तक पहुंच गई।

रूस के उप-विदेश मंत्री आंद्रे रुदेंको (Andrei Rudenko) ने एक बयान जारी कर कहा कि चुनौतीपूर्ण भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद मॉस्को भारत के लिए एक भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार (Reliable Energy Partner) साबित हुआ है।

इसे भी पढ़ेंः पश्चिम एशिया में गहराया संकट: ईरान का 7-दिवसीय प्रस्ताव और डोनाल्ड ट्रम्प का सख्त रुख

होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और रूसी तेल का सहारा

मिडिल ईस्ट में संघर्ष शुरू होने के बाद खाड़ी देशों से भारत को होने वाली पारंपरिक तेल आपूर्ति में भारी गिरावट आई थी। इसके बाद भारतीय तेल रिफाइनरी कंपनियों ने रूसी कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया:

  • मार्च 2026 में उछाल: संघर्ष के शुरुआती दौर में मार्च 2026 के दौरान भारत का रूसी तेल आयात पिछले महीने के मुकाबले दोगुना होकर 2.25 मिलियन बैरल प्रति दिन पहुंच गया, जो भारत की कुल तेल खरीद का लगभग आधा (50%) हिस्सा था।
  • अगस्त व सितंबर के आंकड़े: कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म Kpler के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में भारत को रूसी तेल की सप्लाई औसतन 2.1 मिलियन bpd रही, जबकि सितंबर में यह आंकड़ा 1.9 मिलियन bpd के करीब है।

रूसी समाचार आउटलेट NEWS.ru से बात करते हुए रुदेंको ने कहा कि भारत और रूस के बीच बनी व्यवस्थाओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई रुकावटों के प्रभाव को "काफी हद तक कम" करने का काम किया है।

कुडनकुलम के बाद नए न्यूक्लियर पावर प्लांट की तैयारी

ऊर्जा सहयोग का दायरा केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। रुदेंको ने रूस के सहयोग से तमिलनाडु में चल रहे कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट (KNPP) का जिक्र करते हुए बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि रूसी डिजाइन वाले एक और परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Nuclear Power Plant) के निर्माण के लिए जल्द ही नई जगह (Site) तय कर ली जाएगी।

इसे भी पढ़ेंः भारत का पाकिस्तान पर तीखा पलटवार: 'झूठ दोहराने से सच नहीं बदलता, आतंकवाद के भुगतने होंगे गंभीर नतीजे'

अमेरिकी प्रतिबंधों की आशंका और भारत का रुख

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका द्वारा रूस पर नए प्रतिबंध लगाने और रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क (टैरिफ) थोपने से जुड़ी चर्चाएं गर्म हैं। वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की भी नए अमेरिकी कानूनों के तहत रूस के तेल व्यापार को पूरी तरह से ठप करने की मांग कर रहे हैं।

भारत सरकार की प्रतिक्रिया:

  • 1.4 अरब आबादी की जरूरत: भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसकी 1.4 अरब की विशाल आबादी के लिए सस्ती, निर्बाध और भरोसेमंद ऊर्जा सुनिश्चित करने हेतु बहु-सप्लायर (Multi-supplier) नीति अनिवार्य है।
  • वैश्विक बाजार को चेतावनी: भारत ने वैश्विक मंचों पर चेतावनी दी है कि ऊर्जा आपूर्ति पर किसी भी प्रकार की एकतरफा पाबंदी से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा होगी, जिसका असर विकासशील देशों पर पड़ेगा।

निष्कर्ष

मिडिल ईस्ट में जारी अनिश्चितता के बीच रूसी तेल आयात ने भारतीय अर्थव्यवस्था को ईंधन संकट और महंगाई से बचाने में बफर (Buffer) का काम किया है। मॉस्को और नई दिल्ली का यह मजबूत ऊर्जा गठजोड़ वैश्विक कूटनीति के दबावों के बावजूद एक नई ऊंचाई पर पहुंचता नजर आ रहा है।