नई दिल्ली:
भारत और नीदरलैंड्स ने अपने कृषि और कृषि-तकनीकी सहयोग को नए मुकाम पर ले जाने का फैसला किया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और नीदरलैंड्स के कृषि राज्य सचिव सिल्वियो एर्केंस के बीच हाल ही में नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु बीज उत्पादन, आधुनिक बागवानी तकनीक और जलवायु-अनुकूल (Climate-Smart) कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा।
बीज क्षेत्र के लिए बनेगी अलग कार्ययोजना (Action Plan)
दोनों देशों के बीच पिछले कई वर्षों से कृषि के लिए संयुक्त कार्य समूह की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। हालांकि, इस बार की बैठक बेहद खास रही क्योंकि इसमें बीज क्षेत्र (Seed Sector) पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक अलग, समर्पित कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया गया।
- उद्योग का आधुनिकीकरण: यह कदम भारत के बीज उद्योग को आधुनिक बनाने और उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के उत्पादन को गति देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
- तकनीक हस्तांतरण: इससे सब्जी और फूलों की उच्च उपज वाली किस्मों के आदान-प्रदान और तकनीक हस्तांतरण के नए रास्ते खुलेंगे।
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25 उत्कृष्टता केंद्रों (Centers of Excellence) की समीक्षा
बैठक के दौरान देश भर में नीदरलैंड्स के सहयोग से संचालित 25 'उत्कृष्टता केंद्रों' की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई।
- प्रशिक्षण एवं तकनीक: इन केंद्रों के माध्यम से भारतीय किसानों को ग्रीनहाउस/पॉलीहाउस खेती, आधुनिक नर्सरी प्रबंधन, ड्रिप इरिगेशन और खाद के सटीक इस्तेमाल (Precision Farming) का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- आयात पर निर्भरता में कमी: यूरोपीय देशों से उन्नत किस्मों और उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करने में इन केंद्रों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
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स्मार्ट फार्मिंग और AI आधारित समाधानों पर जोर
बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल पर विशेष चर्चा हुई, जिससे किसानों को मिट्टी की सेहत, मौसम के पूर्वानुमान और सटीक सिंचाई से जुड़े फैसले लेने में मदद मिलेगी। डच प्रतिनिधिमंडल ने भारत के समग्र कृषि दृष्टिकोण (Holistic Approach) की सराहना करते हुए कहा कि ये समाधान नीदरलैंड्स की कृषि प्रणाली के लिए भी काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
कृषि मंत्रालय के अनुसार, आने वाले महीनों में दोनों देशों के तकनीकी अधिकारियों की बैठकें होंगी, जिनमें इस नई बीज कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। इससे नकदी फसलों की खेती करने वाले किसानों की आय में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
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