नई दिल्ली:
केंद्र सरकार ने देश के सबसे विवादित फसल सुरक्षा उत्पादों में से एक 'पैराक्वाट डाइक्लोराइड' (Paraquat Dichloride) के पंजीकरण पर पूरी तरह रोक लगा दी है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कीटनाशी अधिनियम, 1968 के तहत आदेश जारी करते हुए इसके लिए पूर्व में जारी सभी पंजीकरण प्रमाणपत्रों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इसके साथ ही कई महीनों से जारी इस उत्पाद की नियामक समीक्षा औपचारिक रूप से पूरी हो गई है।
कृषि मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना एस.ओ. 5234(ई) (दिनांकित 22 सितंबर 2026) के अनुसार, यह सख्त कदम विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों, आम जनता से प्राप्त आपत्तियों-सुझावों और कीटनाशी पंजीकरण समिति के साथ गहन परामर्श के बाद उठाया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि पैराक्वाट का उपयोग इंसानों और मवेशियों के लिए अत्यधिक जोखिम भरा है, जिस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाना अनिवार्य था।
इसे भी पढ़ेंः मौसम अलर्ट: उत्तर से दक्षिण तक बारिश का सिलसिला जारी, 30 सितंबर के बाद बदलेगा मिजाज
प्रतिबंध के मुख्य कारण:
- कोई विशिष्ट एंटीडोट नहीं: पैराक्वाट से होने वाले जहर (पॉइजनिंग) और उच्च मृत्यु दर के मामलों के इलाज के लिए कोई निश्चित प्रतिविष (Antidote) उपलब्ध नहीं है।
- वैश्विक प्रतिबंध: दुनिया के 70 से अधिक देशों में इस रसायन पर पहले से ही प्रतिबंध या कड़े नियंत्रण लागू हैं।
- गलत इस्तेमाल: गैर-चयनात्मक खरपतवार नियंत्रण (Non-selective Weed Control) के अलावा मूंग और सोयाबीन जैसी फसलों को कटाई से पहले जल्दी सुखाने (Desiccant) के लिए इसका अनधिकृत इस्तेमाल किया जा रहा था।
प्रक्रिया और कार्रवाई के निर्देश:
इस समीक्षा की शुरुआत 14 जनवरी 2026 को गठित विशेषज्ञ समिति से हुई थी, जिसने जून 2026 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद 13 जुलाई 2026 को मसौदा अधिसूचना जारी कर 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे गए थे।
अंतिम आदेश के लागू होते ही अब देश में वैध पंजीकरण के बिना पैराक्वाट का निर्माण, आयात, वितरण या बिक्री पूरी तरह गैर-कानूनी होगी। पंजीकरण समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी पुराने प्रमाणपत्र वापस मंगाएं। वहीं, राज्य सरकारों को अपने-अपने क्षेत्रों में इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने और बाजार में मौजूद पुराने स्टॉक को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसे भी पढ़ेंः बिहार: गंडक नदी के भीषण दबाव से टूटा चंपारण तटबंध, कई गांव जलमग्न; प्रशासन अलर्ट पर
कृषि-आदान उद्योग (Agri-Input Industry) पर असर:
भारत के कृषि-रसायन क्षेत्र के लिए इसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा निर्णय माना जा रहा है। चाय के बागानों, फल-बगीचों और खेत-फसलों में पैराक्वाट का व्यापक इस्तेमाल होता रहा है। अब किसानों और वितरकों को इसके सुरक्षित और मजबूत विकल्पों की ओर रुख करना होगा।
#ParaquatBan #AgricultureIndia #KisanKalyan #PesticideBan #AgriNews #FarmerSafety #IndianAgriculture #MinistryOfAgriculture #BreakingNews
#पैराक्वाटप्रतिबंध #कृषिसमाचार #किसानसुरक्षा #कीटनाशकप्रतिबंध #भारतसरकार #कृषिबदलाव





