मतदाता सूची से नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-7 (Form-7) के लगातार हो रहे दुरुपयोग और बड़ी संख्या में आ रही निराधार शिकायतों को देखते हुए चुनाव आयोग ने कड़े नियम लागू कर दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब व्यक्तिगत मतदाताओं के लिए फॉर्म-7 दाखिल करने की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों पर समान रूप से लागू होगी।

नए नियमों के मुख्य बिंदु

  • आवेदन की नई सीमा: नए निर्देशों के अनुसार, एक मतदाता दावा-आपत्ति की पूरी अवधि में अधिकतम 10 फॉर्म-7 ही दाखिल कर सकेगा। वहीं, मतदाता सूची के निरंतर अपडेट (Continuous Updating) के दौरान एक महीने में अधिकतम 5 आवेदन ही दिए जा सकेंगे।
  • पहले क्या व्यवस्था थी: इससे पहले ऑनलाइन माध्यम से एक बार में अधिकतम 6 आवेदन दाखिल करने की व्यवस्था थी, जबकि भौतिक (ऑफलाइन) फॉर्मों की कोई स्पष्ट सीमा न होने के कारण स्थानीय अधिकारियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
  • दुरुपयोग पर लगाम: आयोग के संज्ञान में आया था कि कुछ मामलों में बिना पर्याप्त आधार के बड़ी संख्या में फॉर्म-7 दाखिल किए जा रहे थे, जिससे वैध मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी होती थी और निर्वाचन अधिकारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ता था।

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अनिवार्य जांच और निष्पक्ष सुनवाई की प्रक्रिया

निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 13(2) के तहत केवल वही व्यक्ति फॉर्म-7 भर सकता है जिसका नाम उस निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज हो। इसके अलावा:

  • मूल हस्ताक्षर अनिवार्य: निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) को यह सुनिश्चित करना होगा कि फॉर्म में सभी जरूरी विवरण भरे हों और आपत्तिकर्ता के मूल हस्ताक्षर हों (हस्ताक्षर की मुहर मान्य नहीं होगी)।
  • सुनवाई का अवसर: आपत्तियों की विधिवत जांच की जाएगी। नियमों के तहत आपत्तिकर्ता को नोटिस देकर व्यक्तिगत रूप से सुना जाएगा, और जिस व्यक्ति के नाम पर आपत्ति दर्ज की गई है, उसे भी आदेश पारित करने से पहले अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

झूठी शिकायत पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई

चुनाव आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई शिकायत झूठी या मनगढ़ंत पाई जाती है, और जानबूझकर गलत लिखित बयान या घोषणा दी जाती है, तो ऐसे आवेदनकर्ता के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दे दिए गए हैं।

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