मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है, जहाँ बैहर और बिरसा ब्लॉक के सुदूर वन क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव, कुपोषण और दूषित पानी की वजह से 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की जान चली गई। जिला मुख्यालय से 60 से 90 किलोमीटर दूर बसे इन ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में फैली इस त्रासदी ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी है।

हादसे के प्रमुख कारण और स्थिति

  • जानलेवा बीमारियां: मृतक बच्चों में मुख्य रूप से खसरा, मलेरिया और सांस लेने में गंभीर तकलीफ के लक्षण पाए गए।
  • कुपोषण और दूषित जल: अधिकांश बच्चे गंभीर रूप से कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) से जूझ रहे थे। इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति ने स्थिति को और भयावह बना दिया।
  • अस्पताल में जगह की कमी: कोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया कि त्रासदी के समय 40 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में करीब 400 बच्चों को भर्ती किया गया था, जो स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की बदहाली को दर्शाता है।

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी और नोटिस जबलपुर हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए दायर जनहित याचिका (PIL) पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए अब तक की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

वहीं, स्थानीय प्रशासन का तर्क है कि घने जंगलों में फैले अंधविश्वास और पारंपरिक झाड़-फूंक के कारण लोग बच्चों को समय पर अस्पताल नहीं लाते, जिससे स्थिति बिगड़ जाती है।

राहुल गांधी ने बोला ज़ोरदार हमला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' के ज़रिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला।

"बालाघाट में 30 से ज़्यादा आदिवासी बच्चों की बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से मौत हो चुकी है। संवेदनहीनता का आलम यह है कि मासूमों की मौतें होती रहीं, लेकिन सरकार सोती रही। मुख्यमंत्री जी, उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो ज़रा राज्य की ज़मीनी हालत भी देखिए।" — राहुल गांधी (नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा)

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश आज देश की सबसे भ्रष्ट और कुशासित सरकार का सामना कर रहा है, जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।

राहत और बचाव कार्य मामला बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग की विशेष मोबाइल टीमें अब गांवों में पहुंचकर बच्चों की मेडिकल स्क्रीनिंग कर रही हैं। दूषित जल की समस्या से निपटने के लिए हैंडपंपों की जांच और साफ पानी के टैंकरों की व्यवस्था की जा रही है। हालाँकि, इस त्वरित कार्रवाई के बावजूद प्रशासनिक लापरवाही पर उठ रहे सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।