बीड / मुंबई
जालना के अंतरवाली सराटी से शुरू होकर मुंबई की ओर बढ़ रहे मराठा आरक्षण आंदोलन को फिलहाल के लिए रोक दिया गया है। मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटील ने महाराष्ट्र सरकार के साथ हुई सकारात्मक बातचीत के बाद अपना अनशन स्थगित करने का ऐलान किया है। उन्होंने सरकार को मांगों के समाधान और 'सातारा गजट' को लागू करने के लिए 3 महीने (90 दिन) का समय दिया है।
जरांगे ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में सरकार ने मराठा समुदाय के साथ वादाखिलाफी की, तो वे पुनः लाखों समर्थकों के साथ मुंबई की तरफ कूच करेंगे।
सुबह 6 बजे सरकारी प्रतिनिधिमंडल से संयुक्त वार्ता
मनोज जरांगे से मुलाकात और बातचीत के लिए महाराष्ट्र सरकार का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल बीड जिले के पाटोदा पहुंचा।
- प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख चेहरे: कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील, मंत्री दादा भुसे, विधायक प्रसाद लाड, विधायक सुरेश धस और बीड के जिलाधिकारी (DM)।
- चर्चा का केंद्र: प्रतिनिधिमंडल और जरांगे के बीच तड़के करीब 6 बजे संयुक्त वार्ता हुई, जिसमें सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया। इसके बाद जरांगे ने 90 दिन की मोहलत देने और अनशन वापस लेने की घोषणा की।
‘शारीरिक रूप से थक चुका हूं’ — जरांगे की समर्थकों से वापस लौटने की अपील
अनशन के 18वें दिन सभा को संबोधित करते हुए मनोज जरांगे पाटील काफी भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि लगातार अनशन के कारण उनका शरीर बेहद कमजोर हो चुका है।
"12 सितंबर को IV फ्लूइड (ड्रिप) बंद करने के बाद मेरे लिए हाथ-पैर हिलाना भी मुश्किल हो रहा था। अत्यधिक शारीरिक थकान के कारण इतनी लंबी यात्रा जारी रखना संभव नहीं है। इसलिए मुंबई पहुंच चुके करीब 1 लाख 7 हजार समर्थक फिलहाल वापस लौटें।"
— मनोज जरांगे पाटील
जरांगे ने समर्थकों से अपील की कि पाटोदा से निकलने के बाद कोई भी उनकी गाड़ी के पीछे काफिले में न चले। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर गाड़ियों का काफिला पीछे-पीछे चलता रहा, तो वे यात्रा रोककर पाटोदा में ही दोबारा धरना शुरू कर देंगे या अंतरवाली सराटी लौट जाएंगे।
मुख्य मांगें और आगे की रणनीति
- सातारा गजट लागू करना: मराठा समुदाय को कुनबी (OBC) प्रमाण पत्र और आरक्षण का लाभ देने के लिए सातारा गजट को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
- मुंबई मार्च का विकल्प खुला: अनशन स्थगित हुआ है, लेकिन आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। अगर 90 दिनों में प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो आंदोलनकारी दोबारा मुंबई का रुख करेंगे।
रात करीब 1:30 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बावजूद जरांगे को सुनने के लिए हजारों की संख्या में लोग (जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं) उनका इंतजार कर रहे थे। सरकार और जरांगे के बीच हुए इस समझौते से फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर राहत महसूस की जा रही है।





