इंटरनेशनल डेस्क, वाशिंगटन। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध के बीच अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया है। अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपना तीसरा विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier), मरीन सैनिकों से लैस युद्धपोत समूह और करीब 9,000 से 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेज रहा है। पेंटागन का यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के ठीक बाद आया है, जिसमें उन्होंने ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू करने के संकेत दिए थे।

अप्रैल के बाद पहली बार तैनात होंगे तीन एयरक्राफ्ट कैरियर

अमेरिकी अधिकारियों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, युद्धपोत, फाइटर जेट्स और नौसैनिक बल नवंबर के अंत तक मिडिल ईस्ट पहुंच जाएंगे।

  • सैन्य बेड़े की आवाजाही: अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट सैन डिएगो से रवाना हो चुका है। वहीं, यूएसएस मेकिन आइलैंड समूह (जिसमें 13वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट शामिल है) भी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है।
  • मौजूदा स्थिति: क्षेत्र में यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश और यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन पहले से तैनात हैं। यदि जॉर्ज वॉशिंगटन के रुकने के दौरान रूजवेल्ट पहुंच जाता है, तो अप्रैल के बाद पहली बार क्षेत्र में एक साथ 3 अमेरिकी विमानवाहक पोत तैनात होंगे। इससे क्षेत्र में पहले से मौजूद 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिकों का आंकड़ा और बढ़ जाएगा।

ट्रंप ने ठुकराया ईरान का 7 दिनों का युद्धविराम प्रस्ताव

ट्रंप ने हाल ही में ईरान द्वारा पेश किए गए 7 दिनों के युद्धविराम प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था। ईरान ने होर्मुज स्ट्रैट को खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के बदले ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी हटाने की शर्त रखी थी। एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया कि यदि कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर से हमले किए जा सकते हैं।

82वीं एयरबोर्न डिवीजन और एयर डिफेंस की तैनाती

बढ़ते खतरों को देखते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एयर डिफेंस यूनिट्स और थल सेना की प्रख्यात 82वीं एयरबोर्न डिवीजन की तैनाती को भी हरी झंडी दे दी है। यह डिवीजन दुश्मन के क्षेत्र में पैराशूट से उतरकर रणनीतिक ठिकानों पर कब्जा करने में माहिर है। फिलहाल, अमेरिकी नौसेना के करीब 20 युद्धपोत ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करने और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा में डटे हुए हैं।

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