खेल एवं रक्षा डेस्क: भारतीय सेना का नाम सुनते ही जहां आंखों के सामने सरहद की सुरक्षा और वीरों की बहादुरी का मंजर तैर जाता है, वहीं सेना अब खेलों के मैदान में भी देश के लिए वर्ल्ड-क्लास चैंपियन तैयार कर रही है। सेना के 'मिशन ओलंपिक विंग' (MOW) ने यह साबित कर दिया है कि हमारे जवान सिर्फ देश की सीमाएं ही नहीं संभालते, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर तिरंगा लहराने का जज्बा भी रखते हैं।

Asian Games 2026 में सेना के खिलाड़ियों का दबदबा

हाल ही में संपन्न हुए एशियन गेम्स 2026 में भारतीय सेना के एथलीटों ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए कुल 20 मेडल (6 गोल्ड, 8 सिल्वर, 6 ब्रॉन्ज) अपने नाम किए।

  • कुल मेडल में हिस्सेदारी: भारत के कुल 85 मेडल्स में से करीब 25% मेडल सेना के जवानों ने जीते।
  • गोल्ड मेडल में शानदार योगदान: भारत को मिले कुल 21 गोल्ड मेडल्स में से 6 गोल्ड अकेले सेना के खिलाड़ियों के नाम रहे, यानी देश के कुल गोल्ड में सेना की हिस्सेदारी 29 फीसदी रही।

रिकॉर्ड तोड़ने वाले प्रमुख सितारे

  • नायब सूबेदार नीरू धांडा (शूटिंग): महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में एशियन रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। वह एशियन गेम्स में इस स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
  • नायब सूबेदार गुलवीर सिंह (एथलेटिक्स): 1500 मी. व 10,000 मी. में सिल्वर और 5000 मी. में ब्रॉन्ज जीतकर 3 व्यक्तिगत मेडल हासिल किए।
  • हवलदार सावन बरवाल (मैराथन): नेशनल रिकॉर्ड के साथ सिल्वर जीता और मैराथन में भारत का 44 साल का मेडल का सूखा समाप्त किया।
  • नायब सूबेदार सर्वेश कुशारे (हाई जंप): 56 साल बाद भारत को इस स्पर्धा में सिल्वर मेडल दिलाया।
  • हवलदार कमलजीत सिंह: सुरुचि सिंह के साथ 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड इवेंट में एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया।
  • रोइंग व आर्चरी: नायब सूबेदार सलमान खान और सतनाम सिंह ने मेंस डबल स्कल्स में ऐतिहासिक मेडल जीता, जबकि सूबेदार धीरज बोम्मदेवरा ने आर्चरी में क्वालिफिकेशन रिकॉर्ड बनाए।

इसे भी पढ़ेंः एशियन गेम्स 2026 मेडल टैली: भारत 85 मेडल के साथ चौथे स्थान पर

क्या है मिशन ओलंपिक विंग (MOW)?

वर्ष 2001 में शुरू किया गया मिशन ओलंपिक विंग सेना का एक विशेष स्पोर्ट्स इकोसिस्टम है। इसका उद्देश्य सेना और देश भर से खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने के योग्य बनाना है।

प्रमुख विशेषताएंविवरण
स्थापना वर्ष2001 (आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, पुणे - 1 जुलाई 2001)
मुख्य केंद्र (ASI पुणे)आर्चरी, एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, डाइविंग, फेंसिंग, वेटलिफ्टिंग व रेसलिंग
नेटवर्क विस्तार28 स्पोर्ट्स नोड्स के माध्यम से अब तक ~9,000 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण
विशेष अकादमियां18 बॉयज स्पोर्ट्स कंपनियां, 2 गर्ल्स स्पोर्ट्स कंपनियां और 1 पैरालंपिक नोड
दी जाने वाली सुविधाएंसाइंटिफिक कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस, फिटनेस, डाइट और मेंटल कंडीशनिंग

टैलेंट की पहचान से लेकर पोडियम पर तिरंगा फहराने तक, मिशन ओलंपिक विंग का यह साइंटिफिक और अनुशासित मॉडल भारतीय खेलों के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख रहा है।

इसे भी पढ़ेंः NCRB की रिपोर्ट: एक दशक में बच्चियों से दुष्कर्म के मामले चार गुना बढ़े

#IndianArmy #MissionOlympicWring #AsianGames2026 #SportsArmy #IndianSports #NeeruDhanda #GulveerSingh #JaiHind #ASI_Pune

#भारतीय_सेना #मिशन_ओलंपिक_विंग #एशियन_गेम्स #सेना_के_चैंपियन #खेल_और_सेना #जय_हिंद