मुरादाबाद
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। मुरादाबाद जिले और मंडल की उन विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोगी दलों ने अपनी सक्रियता तेज कर दी है, जहां लंबे समय से भाजपा को हार का सामना करना पड़ रहा है या फिर जीत-हार का अंतर बहुत मामूली रहा है। सीटों के औपचारिक बंटवारे से पहले एनडीए गठबंधन के घटक दल सम्मेलनों और रैलियों के जरिए अपनी ज़मीन मजबूत कर दावेदारी ठोक रहे हैं।
मुरादाबाद जिले में भाजपा की स्थिति और चुनौतीपूर्ण सीटें
मुरादाबाद की 6 विधानसभा सीटों में से भाजपा का प्रदर्शन पिछले तीन चुनावों में चिंताजनक रहा है:
- 2022 चुनाव: पार्टी को सिर्फ 1 सीट (मुरादाबाद नगर) पर जीत मिली।
- 2017 चुनाव: पार्टी को 2 सीटों (मुरादाबाद नगर और कांठ) पर सफलता मिली।
- 2012 चुनाव: केवल 1 सीट (ठाकुरद्वारा) भाजपा के खाते में आई थी (जो 2014 उपचुनाव में हाथ से निकल गई)।
भाजपा के लिए सबसे कमजोर सीटों का रिकॉर्ड:
| विधानसभा सीट | भाजपा की आखिरी जीत | वर्तमान स्थिति |
| मुरादाबाद देहात | 1993 | पिछले 3 दशकों से जीत का इंतजार। |
| बिलारी | कभी जीत नहीं मिली | पार्टी खाता भी नहीं खोल पाई है। |
| ठाकुरद्वारा | 2012 | 2014 के उपचुनाव के बाद से लगातार हार। |
| कुंदरकी | 1993 | 33 साल बाद केवल हालिया उपचुनाव में जीत मिली। |
सहयोगी दलों की जमीनी सक्रियता और कार्यक्रम
एनडीए में शामिल राष्ट्रीय लोक दल (RLD), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP), अपना दल (एस), निषाद पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) जिले और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बड़े आयोजन कर रहे हैं:
- 13 सितंबर: रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) का मुरादाबाद में सम्मेलन।
- 08 सितंबर: निषाद पार्टी का मंडलीय कार्यकर्ता सम्मेलन।
- 02 अगस्त: अपना दल (एस) का क्षेत्रीय सम्मेलन।
- 04 जून: ठाकुरद्वारा में रालोद (RLD) की 'विजय संकल्प महारैली'।
- 29 अप्रैल: कैलासा बाईपास पर सुभासपा का 'अति पिछड़ा सम्मेलन'।
- आगामी कार्यक्रम (04 नवंबर): रामपुर में अपना दल (एस) का स्थापना दिवस समारोह, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल मुख्य अतिथि होंगी।
मुरादाबाद मंडल की अन्य कमजोर सीटें
केवल मुरादाबाद जिला ही नहीं, बल्कि पूरे मंडल की कई प्रमुख सीटों पर भाजपा लंबे समय से संघर्ष कर रही है:
- संभल: आखिरी जीत 1993 में।
- अमरोहा: आखिरी जीत 1996 में।
- नगीना: आखिरी जीत 1991 में।
- नजीबाबाद: आखिरी जीत 1991 में।
- रामपुर: 2022 के उपचुनाव में पहली बार ऐतिहासिक जीत मिली।
भाजपा नेतृत्व का रुख
सहयोगी दलों की बढ़ती दावेदारी और गतिविधियों पर भाजपा महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला का कहना है कि गठबंधन के सहयोगी दल अपनी जमीन मजबूत करने के लिए कार्यक्रम कर रहे हैं और कुछ सीटों पर दावेदारी भी पेश कर रहे हैं। हालांकि, सीटों का अंतिम बंटवारा भाजपा और सहयोगी दलों के शीर्ष/राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा तय किया जाएगा। फिलहाल भाजपा संगठन सभी सीटों पर अपनी तैयारी पूरी रख रहा है।





