नई दिल्ली:
डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले प्लेटफॉर्म UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले के विरोध में देश भर के व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया है। 2 अक्टूबर को 'No UPI Day' के रूप में मनाते हुए दुकानदारों और व्यापारियों ने अपने संस्थानों के QR स्कैनर को काले कपड़ों से ढककर विरोध दर्ज कराया।
15 सितंबर को सरकार द्वारा किए गए ऐलान के मुताबिक, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR चार्ज लागू होगा। हालांकि यह शुल्क मर्चेंट्स (दुकानदारों) पर लगाया जाएगा और आम उपभोक्ताओं के लिए UPI पेमेंट पहले की तरह पूरी तरह निःशुल्क रहेगा, लेकिन व्यापारिक वर्ग इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहा है।
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सितंबर महीने में घटे UPI ट्रांजैक्शन, क्या MDR है वजह?
NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) द्वारा जारी सितंबर के हालिया आंकड़ों के अनुसार, UPI ट्रांजैक्शन की संख्या और कुल वैल्यू में मामूली गिरावट दर्ज की गई है:
- ट्रांजैक्शन की संख्या: अगस्त में जहां 2,450 करोड़ (24.5 अरब) ट्रांजैक्शन हुए थे, वहीं सितंबर में यह 1.8% घटकर 2,407 करोड़ (24.07 अरब) पर आ गया।
- कुल वैल्यू (मूल्य): अगस्त के ₹29.82 लाख करोड़ के मुकाबले सितंबर में कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू 1.50% घटकर ₹29.37 लाख करोड़ दर्ज की गई।
क्या वास्तव में MDR की वजह से घटे ट्रांजैक्शन?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सितंबर के आंकड़ों में दिख रही गिरावट की वजह MDR चार्ज का डर नहीं, बल्कि महीने के दिनों का अंतर है:
- दैनिक औसत में बढ़ोतरी: अगस्त 31 दिनों का महीना था जबकि सितंबर में 30 दिन होते हैं। यदि रोजाना के औसत ट्रांजैक्शन को देखें तो अगस्त में प्रतिदिन औसतन 79.1 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जबकि सितंबर में यह बढ़कर 80.2 करोड़ प्रतिदिन पहुंच गया।
- उपभोक्ताओं की चिंता: हालांकि आम यूजर्स के लिए UPI फ्री है, लेकिन ग्राहकों में यह डर बना हुआ है कि व्यापारी इस चार्ज की भरपाई उनसे ही कीमतों में बढ़ोतरी करके या मिलने वाले डिस्काउंट को कम करके करेंगे।
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कानूनी लड़ाई जारी
MDR लागू करने के फैसले के खिलाफ मामला अदालत तक भी पहुंचा है, हालांकि फिलहाल इस पर कोई रोक नहीं लग सकी है। मर्चेंट यूनियनों का कहना है कि 0.4% का यह नया शुल्क छोटे और मध्यम कारोबारियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर डालेगा, जिससे वे डिजिटल पेमेंट अपनाने से कतराएंगे।
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