राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव परिणामों ने सूबे की शहरी राजनीति को पूरी तरह मथकर रख दिया है। 10 नगर निगमों समेत विभिन्न निकायों में आए नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर अब पार्टी सिंबल से ज्यादा प्रत्याशी का चेहरा, स्थानीय मुद्दे और बागी उम्मीदवार मायने रखते हैं। जयपुर, कोटा, अलवर और बाड़मेर में जहां भाजपा ने अपना दबदबा साबित किया, वहीं अजमेर, बीकानेर और सीकर में कांग्रेस ने करारा जवाब दिया है।

निकाय चुनाव परिणामों का प्रमुख रिपोर्ट कार्ड

  • जयपुर (भाजपा मजबूत, बड़ा उलटफेर): 150 में से 75 सीटें जीतकर भाजपा बहुमत के बिल्कुल करीब (76 का आंकड़ा) है। सबसे चर्चित नतीजा पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल की हार रहा, जिन्हें कांग्रेस की सुनीता मेठी ने पटखनी दी।
  • अजमेर (36 साल बाद सियासी तख्तापलट): भाजपा के गढ़ अजमेर में कांग्रेस 37 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है, जबकि भाजपा 32 पर सिमट गई। बहुमत (41) के लिए 11 निर्दलीय अब किंगमेकर की भूमिका में हैं।
  • भरतपुर (निर्दलीयों का ऐतिहासिक कब्जा): 65 वार्डों में से निर्दलीयों ने 36 सीटों पर कब्जा जमाकर दोनों राष्ट्रीय दलों को धूल चटा दी। भाजपा को 20 और कांग्रेस को महज 7 सीटें मिलीं।
  • जोधपुर (कांटे की टक्कर): 99 घोषित सीटों में से भाजपा और कांग्रेस दोनों 44-44 पर बराबरी पर हैं। 11 अन्य सीटें अब बोर्ड गठन का फैसला करेंगी।
  • बीकानेर, सीकर और पाली (कांग्रेस की बढ़त): बीकानेर में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है, जबकि सीकर नगर परिषद में 38 सीटें जीतकर कांग्रेस ने जीत की 'हैट्रिक' लगाई। पाली में भी कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है।
  • कोटा, अलवर और बाड़मेर (भाजपा का परचम): कोटा (55 सीटें) और अलवर (28 सीटें) में भाजपा ने बढ़त बनाई। बाड़मेर में भाजपा ने 15 साल बाद 29 सीटें जीतकर ऐतिहासिक वापसी की है।

आगे क्या? शुरू हुआ बाड़ेबंदी का दौर

इन नतीजों का सबसे बड़ा संदेश यही है कि शहरी मतदाता अब किसी एक पार्टी की लहर में बहने के मूड में नहीं है। जहां कांग्रेस के लिए बीकानेर और अजमेर के नतीजे संजीवनी बनकर आए हैं, वहीं जयपुर और कोटा में भाजपा ने अपना किला बचाए रखा है।

अब चुनाव का असली रोमांच 'बोर्ड और मेयर' बनाने की जोड़-तोड़ में है। अजमेर, पाली, जोधपुर और भरतपुर जैसे शहरों में जहां किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां पार्षदों को साधने और 'बाड़ेबंदी' का खेल शुरू हो चुका है। ऊंट किस करवट बैठता है, इसका फैसला आने वाले दिनों में तय होगा।

राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव परिणामों के प्रमुख निष्कर्ष और दलीय स्थिति इस प्रकार हैं:

नगर निगमों की दलीय स्थिति

नगर निगमकुल वार्डभाजपा (BJP)कांग्रेस (INC)निर्दलीय / अन्यबहुमत का स्थिति
जयपुर150755025भाजपा बहुमत से 1 सीट दूर
कोटा10055396भाजपा का स्पष्ट बहुमत
उदयपुर8053234भाजपा का स्पष्ट बहुमत
अजमेर80323711कांग्रेस सबसे बड़ी, त्रिशंकु
बीकानेर80274211कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत
भरतपुर6520738निर्दलीय सबसे बड़ा गुट
जोधपुर100444412बराबरी की टक्कर (1 सीट परिणाम अटका)
अलवर65282314भाजपा सबसे बड़ी पार्टी
पाली65212915कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी

मुख्य राजनीतिक रुझान

  • निर्दलीयों का दबदबा: भरतपुर जैसे शहरों में निर्दलीय किंगमेकर की भूमिका में आ गए हैं। अजमेर, पाली और जोधपुर में बोर्ड बनाने के लिए दोनों प्रमुख दलों को निर्दलीयों के समर्थन की सख्त आवश्यकता होगी।
  • कांग्रेस का मजबूत प्रदर्शन: सीकर (38/65) और बीकानेर (42/80) में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है।
  • भाजपा की वापसी: बाड़मेर नगर परिषद में भाजपा ने 15 साल बाद फिर से बहुमत प्राप्त किया है।
  • बोर्ड गठन की चुनौती: जिन निकायों में त्रिशंकु स्थिति बनी है, वहां 21 सितंबर को होने वाले महापौर/अध्यक्ष चुनाव के लिए पार्षदों का समर्थन जुटाने की कवायद शुरू हो गई है।