राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में राजनीतिक पारा पूरी तरह से चढ़ चुका है। सोमवार को इंडी गठबंधन (INDIA Alliance) के तमाम शीर्ष नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ा मार्च निकालते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे और शीर्ष अदालत में आधिकारिक याचिका दायर करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम से ठीक पहले, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए दिल्ली को एक 'जेल' और 'किला' में तब्दील करने का गंभीर आरोप लगाया है।

राहुल गांधी ने मीडिया और जनता के सामने अपनी बात रखते हुए सवाल उठाया कि पिछले कई दिनों से वोटों की चोरी के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, लेकिन ऐसे में अचानक दिल्ली को जेल जैसा रूप क्यों दे दिया गया है? उन्होंने आरोप लगाया कि शहर के बाहरी इलाकों और सीमाओं पर लोगों को आने से रोका जा रहा है, ट्रेनों और बसों में आवाजाही बाधित की जा रही है, और चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात करके राजधानी को पूरी तरह से छावनी बना दिया गया है।

सुरक्षा तैनाती पर तंज

सरकार की इस कार्यप्रणाली पर कड़ा एतराज जताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सरकार बहुत बड़ी गलती कर रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि सड़कों पर 20,000 से 30,000 पुलिसकर्मी तैनात रहें, क्योंकि इससे देश की जनता को यह साफ नजर आ जाएगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा को कितना सुनिश्चित करना चाहते हैं। उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि ज्ञानेश कुमार को जितनी अधिक सुरक्षा दी जाएगी, हम आखिरकार उनके असली 'कंट्रोलर' तक उतनी ही आसानी से पहुंच सकेंगे। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि उन्हें इस तरह की अंदरूनी खबरें मिल रही हैं कि कई सुरक्षाकर्मी और पुलिसकर्मी खुद को असहज और परेशान महसूस कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें आम युवाओं और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करने का आदेश दिया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर खास तौर पर आरएसएस (RSS) के सदस्यों को खुली छूट देने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

इस्तीफे की मांग और कड़ी चेतावनी

राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधे तौर पर आड़े हाथों लेते हुए सवाल किया कि आखिर ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे हैं? उन्होंने कहा कि यह सारा विवाद इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि विपक्ष लगातार वही वाजिब सवाल पूछ रहा है जो पहले दो अन्य चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाए गए थे। ज्ञानेश कुमार को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी नींद उड़ चुकी है और विपक्ष उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शेगा नहीं, क्योंकि उनके अतीत और उनके कथित भ्रष्टाचार से जुड़े सभी दस्तावेज व जानकारियां हमारे पास मौजूद हैं और हम सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं।

आगे की कानूनी और राजनीतिक रणनीति का खुलासा करते हुए राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने और कांग्रेस अध्यक्ष ने मिलकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक विस्तृत पत्र लिखा था। इस पत्र में देश के भीतर भारतीय लोकतंत्र की स्थिति और चुनावों की निष्पक्षता पर गहरी चिंता व्यक्त की गई थी। इसके जवाब में सीजेआई ने उन्हें औपचारिक रूप से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का निर्देश दिया था, जिसके तहत आज इंडी गठबंधन के सभी प्रमुख नेता एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचेंगे और याचिका दाखिल करेंगे।

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पुलिस और सुरक्षाबलों का अंदरूनी समर्थन

अपने बयानों के अंत में राहुल गांधी ने दावा किया कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा बलों का भी एक बड़ा हिस्सा उनके साथ है। उन्होंने कहा कि लगभग 50 प्रतिशत पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल व्यक्तिगत रूप से उनसे यह कह रहे हैं कि विपक्ष जो लड़ाई लड़ रहा है, वह बिल्कुल सही है और उन्हें पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने इस पूरे संघर्ष को जनता और व्यवस्था के बीच की लड़ाई बताते हुए कहा कि एक तरफ देश की आम जनता, पुलिस, आईटीबीपी (ITBP) और सीआरपीएफ (CRPF) जैसी सुरक्षा एजेंसियां हैं, तो दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी, अमित शाह, अजीत डोभाल, ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के कुछ चुनिंदा सदस्य हैं जो कथित तौर पर 'वोट चोरी' और देश के तंत्र को हाईजैक करने में मदद कर रहे हैं। विपक्ष इस वैचारिक और राजनीतिक अंतर को और अधिक स्पष्ट करते हुए जनता के सामने उजागर कर रहा है।

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