नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बड़ी राहत दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र की निचली अदालत में इस मामले की आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। साथ ही, शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश की भी समीक्षा करने पर सहमति जताई है, जिसमें 2019 के समन को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।

अदालत का आदेश और नोटिस

मंगलवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता महेश श्रीश्रीमल को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा।

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क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद सितंबर 2018 में राजस्थान में दी गई एक सार्वजनिक सभा से जुड़ा है। शिकायतकर्ता महेश श्रीश्रीमल (जो खुद को भाजपा का सदस्य बताते हैं) ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिससे प्रधानमंत्री के साथ-साथ भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।

इस शिकायत के आधार पर मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत ने 28 अगस्त 2019 को राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया था। इसके खिलाफ राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था, जिसे 8 सितंबर 2026 के फैसले में हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए समन रद्द करने से मना कर दिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने निचली अदालत को सुनवाई छह सप्ताह के लिए टालने का निर्देश दिया था ताकि राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें।

अब शीर्ष अदालत के इस नए आदेश के बाद निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लग गई है और सबकी निगाहें चार सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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