अमेरिका की संसद (Congress) ने रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर नकेल कसने के उद्देश्य से एक नया विधेयक पारित किया है। 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' (Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act) नाम के इस नए कानून के तहत भारत और चीन जैसे देशों से आने वाले सामानों पर 100 फीसदी तक का भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान है। हालांकि, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों और व्यापारिक जानकारों का मानना है कि भारत पर दबाव बनाने की कोशिश में उठाया गया यह कदम खुद अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

अमेरिकी उपभोक्ताओं और रसोई पर सीधा असर

अमेरिका इस समय पहले से ही उच्च मुद्रास्फीति (High Inflation) का सामना कर रहा है। टीटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय के जैन के अनुसार, भारतीय उत्पादों पर 100% टैक्स लगाना जलती आग में घी डालने जैसा होगा:

  • महंगे होंगे रोजमर्रा के सामान: अमेरिका भारत से बड़े पैमाने पर कपड़े, टेक्सटाइल, घरेलू सामान और दवाइयाँ आयात करता है।
  • दोगुनी कीमतें: टैरिफ लागू होने से अमेरिकी रिटेल स्टोरों पर ये उत्पाद अचानक दो गुने दामों पर बिकने लगेंगे, जिससे आम अमेरिकी नागरिकों का बजट बिगड़ जाएगा।

दबाव की नीति और एक्सपर्ट्स की राय

थिंक-टैंक GTRI और अपेरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के चेयरमैन ए. शक्तिवेल का कहना है कि यह बिल केवल भारत पर दबाव बनाकर अपने पक्ष में अनुचित व्यापारिक समझौते थोप ने का एक जरिया है।

प्रमुख संस्था / विशेषज्ञवक्तव्य / विश्लेषण
GTRI (थिंक-टैंक)अमेरिका इस कानून का इस्तेमाल भारत को रूसी तेल खरीदने से रोकने और रियायतें ऐंठने के लिए कर रहा है।
ए. शक्तिवेल (AEPC)यह बिल सिर्फ भारत पर व्यापारिक दबाव बनाने का एक साधन है।
अजय सहाय (FIEO)टैरिफ से व्यापार में अनिश्चितता बढ़ती है; निर्यातक स्थिति पर सतर्कता से नजर रखे हुए हैं।

भारत के पास विकल्प, अमेरिका के लिए जोखिम

यह बिल अमेरिकी संसद से पारित होकर अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है। भारतीय निर्यातकों की रणनीति और बाजार की स्थिति इस प्रकार है:

  • शिपमेंट में तेजी: नुकसान से बचने के लिए कई भारतीय निर्यातक समय से पहले अपने शिपमेंट भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
  • विकल्प मौजूद: आज भारत के पास दुनिया भर में कई अन्य देशों के वैकल्पिक बाजार उपलब्ध हैं। यदि अमेरिका अपने दरवाजे महंगे करता है, तो भारत अन्य बाजारों में अपना निर्यात मोड़ सकता है।
  • सप्लाई चेन संकट: सस्ते और गुणवत्तापूर्ण भारतीय आयात के बिना अमेरिका का घरेलू सप्लाई चेन नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।