नई दिल्ली:

संसद भवन से लेकर चुनाव आयोग के दफ्तर तक आज राजधानी की सड़कों पर 'इंडिया' गठबंधन का प्रचंड राजनीतिक घमासान देखने को मिला। केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विपक्ष के करीब 300 लोकसभा और राज्यसभा सांसद सड़कों पर उतर आए। इस दौरान गठबंधन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और संघ प्रमुख पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला।

चुनाव आयोग कार्यालय से महज 50 मीटर की दूरी पर पुलिस द्वारा रोके जाने पर राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:

"हम लोग देश के लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। हम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके सहयोगियों से मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे। चुनाव आयोग का निष्पक्ष काम सही तरीके से चुनाव कराना है, लेकिन पता नहीं ज्ञानेश कुमार किस बात से डरे हुए हैं? जब देश के 300 चुने हुए प्रतिनिधियों से ही चुनाव आयुक्त नहीं मिलेंगे, तो फिर लोकतंत्र के मायने ही क्या रह जाते हैं?"

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संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दोटूक चेतावनी भरे लहजे में कहा:

"एक बात मैं पूरी तरह साफ कर देना चाहता हूँ—देश के खिलाफ जो किया गया है, वह सीधे तौर पर देशद्रोह है। इसमें शामिल किसी भी चेहरे को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे नरेंद्र मोदी हों, अमित शाह, ज्ञानेश कुमार हों या मोहन भागवत। सब पर कानून के तहत कार्रवाई होगी। हम न सिर्फ भाजपा की नीतियों का मुकाबला करेंगे, बल्कि उनके इस तंत्र को खत्म कर देंगे।"

विपक्ष का आरोप है कि लोकतंत्र की जननी कहे जाने वाले भारत में अब जन प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने की बुनियादी आजादी भी नहीं दी जा रही है। 50 मीटर की दूरी पर पुलिस बल लगाकर सांसदों को रोकना यह साफ दर्शाता है कि संवैधानिक संस्थाएँ दबाव में काम कर रही हैं।

प्रमुख बिंदु

  • 300 सांसदों का शक्ति प्रदर्शन: 'इंडिया' गठबंधन के 300 से अधिक सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग दफ्तर की ओर पैदल मार्च निकाला।
  • संस्थानों पर सीधा हमला: राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए संवाद से भागने का आरोप लगाया।
  • कड़े तेवर: राहुल गांधी ने देश के मौजूदा हालात को 'देशद्रोह' करार देते हुए जवाबदेही तय करने की बात कही।

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