नई दिल्ली में मंगलवार को उस वक्त सियासी पारा अचानक चढ़ गया जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक आवास पर एक अहम 'चाय पर चर्चा' (हाई-टी मीटिंग) का आयोजन किया। इस बैठक में इंडी गठबंधन (INDI Alliance) के शीर्ष नेताओं के साथ-साथ विभिन्न छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। बैठक के तुरंत बाद आयोजित एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और लोकतंत्र को कथित रूप से कुचलने का गंभीर आरोप लगाया।

'चाय पर चर्चा' और विपक्षी दिग्गजों का जमावड़ा

राहुल गांधी के आवास पर हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाअर्जुन खरगे, सोनिया गांधी, शशि थरूर और सचिन पायलट सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसके अलावा इंडी गठबंधन के प्रमुख चेहरों में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव व मनोज झा, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा व सागरिका घोष, शिवसेना (उद्धव गुट) नेता संजय राउत, सीपीआई-एम के एम.ए. बेबी, सीपीआई के डी. राजा और अन्य प्रमुख नेता शामिल हुए।

बैठक के एजेंडे पर बात करते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि देश की जनता हमसे उम्मीद कर रही है कि हम सही तरीके से अपनी आवाज उठाएं और देश के लोकतंत्र की रक्षा करें। वहीं, मीटिंग में शामिल होने जा रहे कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यह संदेश इतना महत्वपूर्ण है कि इसके लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

CEC ज्ञानेश कुमार और सरकार पर राहुल गांधी का तीखा हमला

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने सरकार और चुनाव आयोग पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:

"यह प्रदर्शन एक खास मिशन के साथ जारी है। हम सभी देश के लोकतंत्र को बचाने के मिशन में लगे हुए हैं। आम आदमी के अधिकार छीने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और ज्ञानेश कुमार मिलकर लोकतंत्र को तबाह कर रहे हैं।"

राहुल गांधी ने आगे आक्रामक रुख अपनाते हुए मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम इसके लिए जंतर-मंतर पर संघर्ष करेंगे और हमें उम्मीद है कि न्यायपालिका यानी सुप्रीम कोर्ट इस दिशा में अपना उचित काम करेगा।

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इंडी गठबंधन के नेताओं की दो-टूक: "आर-पार की लड़ाई"

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला:

  • सुप्रिया सुले (एनसीपी-शरद पवार गुट): "हम पूरी ताकत के साथ एक मंच पर एकजुट हैं और हमारा यह आंदोलन मजबूती से आगे जारी रहेगा।"
  • प्रशांत भूषण (प्रसिद्ध अधिवक्ता): "सिविल सोसाइटी पूरी तरह से इस मुहिम में साथ है। अब इस आंदोलन में किसानों और ट्रेड यूनियनों का भी बड़ा समर्थन जुड़ेगा। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना हमारा मौलिक और संवैधानिक अधिकार है।"
  • सागरिका घोष (टीएमसी सांसद): "विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को केवल वोट चोरी के एजेंडे के तहत तैयार किया गया है। हम हर कदम पर इंडी गठबंधन के साथ खड़े हैं।"
  • संजय राउत (शिवसेना-उद्धव गुट): उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि पूरा सिस्टम एक तरह के संकट से गुजर रहा है।
  • नेहा बोरा (AISA अध्यक्ष): "ज्ञानेश कुमार की नीतियां लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। तमाम विपक्षी दल और छात्र संगठन इस तानाशाही के खिलाफ एकजुट हैं।"

विपक्ष मुख्य रूप से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने की मांग कर रहा है और आरोप लगा रहा है कि चुनाव आयोग निष्पक्षता खो चुका है।

सत्ता पक्ष का पलटवार: पीयूष गोयल ने राहुल गांधी को बताया 'रेड फ्लैग'

विपक्ष के इस तीखे तेवर और विरोध प्रदर्शन पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र सरकार ने भी कड़ा पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा:

"मैं राहुल गांधी को 10 कड़े सवालों का जवाब देने की खुली चुनौती देता हूं। देश के कई लोग और युवा पीढ़ी राहुल गांधी को सबसे बड़ा 'रेड फ्लैग' (अशुभ संकेत) मानती है, जिनकी गलत नीतियों और नेतृत्व के कारण कांग्रेस पार्टी बार-बार चुनावों में हार का मुंह देख रही है।"

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