बेंगलुरु/कलबुर्गी: सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को केवल दो स्टैंजा (छंद) तक सीमित करने के कर्नाटक सरकार के फैसले पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच राजनीतिक घमासान और तेज हो गया है। इस बीच, कर्नाटक के ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री प्रियांक खरगे ने बीजेपी नेताओं को सीधी और खुली चुनौती देकर विवाद को नया मोड़ दे दिया है।

कलबुर्गी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा कि यदि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक बिना टेलीप्रॉम्प्टर या कागज देखे 'वंदे मातरम' के सभी छह स्टैंजा गाकर दिखा दें, तो वह तुरंत अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे।

नेहरू, बोस और टैगोर का दिया हवाला

बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए खरगे ने ऐतिहासिक संदर्भों का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया:

"हमारे स्वाधीनता संग्राम के पूर्वजों ने तय किया था कि वंदे मातरम के पहले दो स्टैंजा ही गाए जाएंगे। अब बीजेपी और पीएम मोदी जबरन सभी स्टैंजा गवाना चाहते हैं। क्या वे पंडित जवाहरलाल नेहरू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर से भी बड़े ज्ञानी हो गए हैं?"

विवाद की मुख्य वजह: केंद्र का निर्देश बनाम 1937 का कांग्रेस प्रस्ताव

  • केंद्र सरकार का रुख: 'वंदे मातरम' के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक आधिकारिक निर्देश (9 जुलाई 2026 के पत्र के माध्यम से) जारी किया था। इसमें स्पष्ट किया गया है कि वंदे मातरम का आधिकारिक संस्करण सभी छह स्टैंजा वाली पूरी रचना है और सामूहिक गायन या राष्ट्रगान के साथ बजने पर इसके सभी स्टैंजा गाए जाने चाहिए।
  • कांग्रेस का स्टैंड: कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने 19 अगस्त को स्पष्ट किया कि पार्टी 1937 में अपनाए गए अपने ऐतिहासिक प्रस्ताव पर ही कायम रहेगी, जिसके तहत केवल शुरुआती दो स्टैंजा ही गाए जाते हैं। कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने भी राज्य के कार्यक्रमों में केवल 2 स्टैंजा गाने का आदेश जारी किया है, जिसे बीजेपी तुष्टिकरण की राजनीति बता रही है।

कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंची कानूनी लड़ाई

राजनीतिक खींचतान के बीच यह मामला अब अदालती चौखट तक पहुंच गया है। अधिवक्ता गिरीश भारद्वाज ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर राज्य सरकार के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें केवल दो स्टैंजा गाने का नियम बनाया गया है।

याचिका में तर्क दिया गया है कि राज्य सरकार का यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। केंद्र ने सभी राज्यों को राष्ट्रगीत के आधिकारिक 6-स्टैंजा वाले संस्करण का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया था, इसलिए राज्य सरकार के इस आदेश को असंवैधानिक घोषित कर रद्द किया जाए।