पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि,बरही।बरही विधायक मनोज कुमार यादव ने झारखंड विधानसभा में तिलैया जलाशय से विस्थापित परिवारों की समस्याओं को लेकर तारांकित प्रश्न के माध्यम से सरकार से जवाब मांगा। विधायक ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास,जमाबंदी पर्चा न मिलने और सरकारी योजनाओं से वंचित रहने को लेकर कई अहम सवाल उठाए।
विधायक मनोज कुमार यादव ने सरकार से सवाल किया कि क्या यह बात सही है कि 1951-52 में तिलैया जलाशय निर्माण के दौरान हजारीबाग जिले के बरही अंचल के नाथुवामारन चचरो, पडीरमा, माधोपुर गांव के लोगों को विस्थापित कर कोलंगा, बसरिया (पंचमाधव), लचुडीह, गाजो, हरला में पुनर्वासित किया गया,जिसका जमाबंदी पर्चा नहीं मिला है।
विधायक मनोज कुमार यादव ने सवाल किया है कि क्या यह सही है कि 2016 में जारी विभागीय संकल्प संख्या-820 के तहत भू-अर्जन से प्रभावित विस्थापित परिवारों को पुनर्वास स्थल और आवंटित भूमि का स्वामित्व देने का निर्देश दिया गया था,क्या यह सही है कि विस्थापित परिवारों को जमाबंदी पर्चा नहीं मिलने से वे सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहें हैं।इसके जवाब में राजस्व,निबंधन एवं भूमि सुधार मंत्री ने स्वीकार किया कि दामोदर घाटी निगम से विस्थापित कुल 38 रैयतों को शुद्धि पत्र जारी किया गया है। इसमें मौजा-बसरिया में 0.56 एकड़ भूमि के लिए 4 शुद्धि पत्र और मौजा-कोलंगा में 40.5852 एकड़ भूमि के लिए 34 शुद्धि पत्र जारी किए गए हैं। हालांकि अधिकांश प्लॉट वन भूमि के रूप में अधिसूचित होने के कारण जमाबंदी प्रक्रिया में कठिनाई आ रही है।
मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि 2016 के संकल्प के अनुसार विस्थापित परिवारों को आवंटित भूमि का स्वामित्व मिलना चाहिए, लेकिन हजारीबाग जिले के बरही अंचल के बरसोत थाना संख्या-139, खाता संख्या-187 और चुन्दिया गजुवा थाना संख्या-134, खाता संख्या-88 में स्थित 400 एकड़ भूमि वन भूमि घोषित है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि वन विभाग से अनुमति लंबित है।
मंत्री ने बताया कि हजारीबाग के उपायुक्त ने 12 सितंबर 2024 को पत्रांक-2185/रा० के तहत वन प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी वन प्रमंडल, हजारीबाग को विस्थापित परिवारों को मालिकाना हक देने हेतु 400 एकड़ भूमि को डी-नोटिफाई करने का प्रस्ताव भेजा है। वन विभाग द्वारा इस पर अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया कि तिलैया डैम से विस्थापित परिवारों को मालिकाना हक तभी मिल सकेगा, जब भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम 1980 के तहत पूर्वानुमति प्राप्त होगी।
इस सम्बंध में विधायक मनोज कुमार यादव ने कहा कि विस्थापितों को लेकर वह लगातार आवाज उठाते रहे है, इससे पहले भी उनके द्वारा इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सरकार तक मामले को पहुंचाया गया है। विधायक ने आश्वस्त किया कि विस्थापितों को न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता रही है।





