हजारीबाग।रामगढ़ से कांग्रेस विधायक ममता देवी समेत सभी 13 आरोपियों को पांच-पांच साल की सजा सुनायी गयी है और 10-10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है।एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट के न्यायाधीश कुमार पवन की अदालत ने मंगलवार दोपहर 3:40 बजे फैसला सुनाया। न्यायाधीश ने रजरप्पा थाना कांड संख्या 79-2016 के तहत 13 आरोपियों को दोषी करार देते हुए अलग-अलग धाराओं में सजा सुनायी और जुर्माना लगाया है।
विधायक ममता देवी को धारा-148 और 332 में दो साल सश्रम कारावास की भी सजा सुनायी गयी है,जबकि धारा-333 और धारा-307 में पांच साल की सजा व 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है।ममता को पांच वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद इनकी विधायकी जानी तय है।ममता की विधायकी सजा की तारीख से ही निरस्त मानी जाएगी।कोर्ट के फैसले की कॉपी विधानसभा पहुंचने के बाद स्पीकर रबींद्रनाथ महतो आगे की कार्रवाई करेंगे़।
इधर कोर्ट ने अभियुक्त राजीव जायसवाल को पांच साल के अलावा आर्म्स एक्ट की धारा-27 में भी दोषी माना और तीन साल की सजा सुनायी और 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।सभी 13 आरोपियों की सजा साथ-साथ चलेगी। जुर्माना नहीं देने पर छह माह कारावास की सजा बढ़ायी जाएगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई पेशी
न्यायाधीश कुमार पवन की अदालत में मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सभी दोषियों की पेशी हुई।आठ दिसंबर को दोषी करार दिए जाने के बाद कोर्ट ने सभी दोषियों को हजारीबाग स्थित जेपी केंद्रीय कारा भेज दिया था।इनमें विधायक ममता देवी, राजीव जायसवाल, लाल बहादुर महतो, बासुदेव प्रसाद, मनोज पुजहर, सुभाष महतो, बालेश्वर भगत, कुंवर महतो, दिलदार अंसारी, अभिषेक सोनी, आदिल इनामी, यदु महतो, ममता देवी और कौलेश्वर महतो है।
29 अगस्त 2016 को हुआ था आंदोलन
रामगढ़ के गोला प्रखंड स्थित आईपीएल फैक्टरी में जमीन अधिग्रहण और मजदूरों की समस्याओं को लेकर 29 अगस्त 2016 को आंदोलन हुआ था।नागरिक चेतना मंच गोला के बैनर तले इनलैंड पावर लिमिटेड के मुख्य गेट के पास सैकड़ों लोग प्रदर्शन कर रहे थे।आंदोलन उग्र होने पर पुलिस को 47 राउंड गोली चलानी पड़ी थी।इस दौरान दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गयी थी,जबकि आठ घायल हुए थे।इस मामले को लेकर गोला बीडीओ दिनेश कुमार सुरीन ने रजरप्पा थाना में 79-2016 के तहत मामला दर्ज कराया था।इसमें 50 नामजद और 400 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था।
हाईकोर्ट जायेंगे
ममता देवी को सजा सुनाए जाने के बाद उनके पति बजरंग महतो अपने तीन माह के बच्चे के साथ पत्रकारों के सामने आए। उन्होंने का कि ममता देवी के जेल जाने से हमारा परिवार घबराने वाला नहीं है,मेरा तीन माह का बेटा हम लोगों को हिम्मत देगा।उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले का सभी सम्मान करते हैं, लेकिन अब मामले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।
सजा पूरी करने के बाद भी छह साल तक नहीं लड़ पाएंगी चुनाव
बता दें कि देश में लागू जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में जनप्रतिनिधियों जैसे सांसदों व विधायकों के किसी आपराधिक मामले में सजा सुनाए जाने के बाद उनकी सदस्यता समाप्त करने और चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है।इसके तहत किसी सांसद या विधायक के दो साल या इससे अधिक की सजा होने पर उसकी सदस्यता समाप्त हो जाती है।साथ ही सजा की अवधि पूरी होने के बाद अगले छह साल के लिए उसके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध रहता है।
इनकी जा चुकी है विधायकी
राज्य में सबसे पहले इस अधिनियम के तहत आजसू विधायक कमल किशोर भगत (अब स्वर्गीय) की सदस्यता गयी थी। वर्ष 1993 के एक मामले में भगत को जून 2015 में हत्या के प्रयास के एक मामले में 7 साल की सजा दी गयी थी।भगत लोहरदगा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे।जेल जाने के बाद भगत की पत्नी नीरू शांति वहां से चुनाव लड़ीं और हार गयीं।
झारखंड पार्टी के कोलेबिरा से विधायक एनोस एक्का की सदस्यता भी इसी अधिनियम के तहत गयी थी।वर्ष 2014 में हत्या के एक मामले में एक्का की गिरफ्तारी हुई थी। इस मामले में वर्ष 2018 में सजा होने पर एनोस एक्का की सदस्यता चली गयी थी। एक्का के जेल जाने के बाद कोलेबिरा सीट से एक्का की पत्नी मेमन एक्का ने चुनाव लड़ा था और भी जीत नहीं पायीं थीं।
सिल्ली से झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक रहे अमित महतो की सदस्यता भी इसी अधिनियम के तहत चली गयी थी।वर्ष 2006 के एक मामले में महतो पर मारपीट का आरोप था।इस मामले में निचली अदालत ने महतो को सजा दी थी। महतो को वर्ष 2018 में दो साल की सजा दी गयी थी।महतो की विधायिकी जाने के बाद उनकी पत्नी सीमा महतो ने चुनाव लड़ा था।चुनाव जीतने के बाद शेष कार्यकाल के लिए उनकी पत्नी विधायक बनीं थीं।
वर्ष 2018 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के गोमिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक योगेंद्र महतो को भी निचली अदालत से सजा हुई थी।इसके बाद महतो की विधायिकी चली गयी थी।महतो पर वर्ष 2010 में कोयला चोरी का आरोप लगा था। रामगढ़ जिला न्यायालय ने इस मामले में महतो को तीन साल की सजा थी। महतो की सदस्यता जाने के बाद उनकी पत्नी सरिता महतो ने चुनाव लड़ा था।जीतने के बाद वह शेष कार्यकाल के लिए विधायक बनीं।
बंधु तिर्की को इसी अधिनियम के तहत 28 मार्च 2022 को सजा हुई थी।सजा मिलने के बाद उनकी विधायिकी चली गयी थी।मांडर विधानसभा सीट से उनकी बेटी ने शिल्पी नेहा तिर्की ने चुनाव लड़ा था और वहां से विधायक चुनी गयीं हैं।





