रियाद: खाड़ी देशों में तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले तेल क्षेत्र पर सीधा हमला बोल दिया। धहरान स्थित सऊदी अरामको की सरकारी तेल कंपनी के हेडक्वार्टर पर हुए हमले के बाद एक इमारत में भीषण आग लग गई। वहीं, राजधानी रियाद में हूती मिसाइलों को रोके जाने के बाद गिरे मलबे से 4 लोग घायल हो गए और 15 मकानों को नुकसान पहुँचा है। इस बीच, इजरायल द्वारा सऊदी अरब को सैन्य मदद देने की पेशकश ने कूटनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
अरामको पर हमले से वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता
समाचार एजेंसी AFP के अनुसार, सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि मंगलवार शाम अरामको की एक बिल्डिंग को निशाना बनाया गया, जिससे वहाँ आग लग गई। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की आधिकारिक खबर नहीं है। दूसरी ओर, सऊदी सिविल डिफेंस एजेंसी ने पुष्टि की कि रियाद की ओर दागी गई दो क्रूज मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया गया, जिसके मलबे से दो महिलाओं, एक पुरुष और एक बच्चे को चोटें आईं और 15 घर क्षतिग्रस्त हो गए।
अरामको पर हुआ यह हमला केवल सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि दुनिया के ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधित होने के कारण दबाव झेल रही सऊदी अर्थव्यवस्था (जिसमें इस साल आईएमएफ ने 3.3% गिरावट का अनुमान जताया है) के लिए यह बड़ा झटका है।
डोनाल्ड ट्रंप और ईरान की प्रतिक्रिया
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान के इशारे पर काम कर रहे हूती विद्रोहियों को आड़े हाथों लिया है। 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने आरोप लगाया कि हूती अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले जानबूझकर दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि हूतियों को एक साल पहले हुई अमेरिकी बमबारी से सबक लेना चाहिए था। उधर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया है कि तेहरान सऊदी अरब और हूतियों के बीच मध्यस्थता कराने के लिए तैयार है।
इसे भी पढ़ेंः हूती विद्रोहियों के मिसाइल व ड्रोन हमलों ने उड़ाई नींद, अमेरिकी 'पैट्रियट' एयर डिफेंस सिस्टम हुआ फेल
इजरायल की सैन्य मदद की पेशकश और कूटनीतिक मायने
इजरायली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के माध्यम से सऊदी अरब को हूतियों के खिलाफ सैन्य सहायता देने की पेशकश की है। नेतन्याहू इसे सऊदी अरब के साथ कूटनीतिक रिश्ते सामान्य करने के एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने फिलहाल जनता की संभावित नाराजगी के डर से इस प्रस्ताव का खुलकर समर्थन नहीं किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में सऊदी अरब और इजरायल के बीच संबंध सुधरते हैं, तो यह 'अब्राहम अकॉर्ड' के दायरे को आगे बढ़ाने में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। हालांकि, फिलिस्तीन के मुद्दे और गाजा युद्ध के वर्तमान हालात के चलते सऊदी अरब अभी फिलिस्तीन के गठन की शर्त पर अड़ा हुआ है, जिससे दोनों देशों के बीच पूर्ण समझौतों की राह आसान नहीं दिखती।
#सऊदीअरब #अरामकोहमला #हूतीविद्रोही #इजरायल #डोनाल्डट्रंप #मध्यपूर्वसंकट #अंतरराष्ट्रीयसमाचार #SaudiAramco #HouthiAttack
#SaudiArabia #AramcoAttack #HouthiRebels #Israel #DonaldTrump #MiddleEastCrisis #Geopolitics #GlobalOil #WorldNews





