अवैध निर्माण पर दिल्ली सरकार का कड़ा रुख: सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी को बुलडोजर चलाने और सघन जांच के निर्देश
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला पीजी भवन ढहने की दुखद घटना के बाद दिल्ली सरकार ने अवैध निर्माण और नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। 6 सितंबर को हुए इस भीषण हादसे में 7 लोगों की जान चली गई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस त्रासदी पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नगर निगम (MCD) को अवैध निर्माणों पर बिना देरी बुलडोजर चलाने और राजधानी भर के सभी पीजी व हॉस्टलों का सघन निरीक्षण करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
ग्राउंड पर उतरेंगे वरिष्ठ अधिकारी, रुकेगा अवैध निर्माण
मुख्यमंत्री के आदेश के तहत बुधवार से ही दिल्ली के विभिन्न इलाकों में कार्रवाई तेज की जा रही है। एमसीडी के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को दफ्तरों से निकलकर सीधे ग्राउंड पर मौजूद रहने और अपनी देखरेख में सीलिंग व ध्वस्तीकरण की निगरानी करने को कहा गया है।
अवैध निर्माण का रिकॉर्ड खंगाल तय होगी अफसरों की जवाबदेही
प्रशासन की यह कार्रवाई केवल इमारतों को गिराने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके पीछे की प्रणालीगत कमियों को भी उजागर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि:
- रिकॉर्ड की जांच: यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित अवैध निर्माण किस वर्ष में हुआ था।
- जवाबदेही का निर्धारण: उस समय संबंधित क्षेत्र किस अधिकारी या प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार में आता था, इसका ब्योरा तैयार कर दोषी अधिकारियों की पहचान की जाएगी।
सत्य निकेतन हादसे की जांच और अब तक का एक्शन
शुरुआती जांच में सामने आया है कि सत्य निकेतन की दुर्घटनाग्रस्त इमारत में अवैध रूप से अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं तथा बेसमेंट व ग्राउंड फ्लोर पर बिना अनुमति मरम्मत का काम चल रहा था। हादसे के तुरंत बाद एमसीडी ने इलाके में चार मंजिल से अधिक के अवैध निर्माणों को सील करने का आदेश दिया था। मामले में भवन स्वामी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है और मजिस्ट्रियल जांच जारी है।
निजी पीजी व हॉस्टल सुरक्षा के लिए प्रस्तावित नई व्यवस्था
भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए दिल्ली सरकार निजी हॉस्टलों और पीजी को विनियमित करने के लिए एक सख्त कानून का मसौदा तैयार कर रही है। इसमें मुख्य प्रावधान शामिल होंगे:
- अनिवार्य सरकारी लाइसेंस और सार्वजनिक पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण
- पुलिस वेरिफिकेशन (क्लियरेंस)
- स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी (ढांचागत मजबूती) और फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट
दिल्ली सरकार के इन सख्त निर्देशों के बाद अब पूरी राजधानी में अवैध निर्माणकर्ताओं और नियमों की अनदेखी करने वाले पीजी संचालकों के खिलाफ एक बड़े प्रशासनिक अभियान की शुरुआत हो चुकी है।





