न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान भारत ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा और नाविकों (Seafarers) की सुरक्षा को लेकर एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पहल की शुरुआत की है। भारत और लाइबेरिया ने संयुक्त रूप से 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स' (GoF on S4) की स्थापना की है, जिसकी पहली बैठक की अध्यक्षता भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब भारत दुनिया के सबसे बड़े नाविक आपूर्तिकर्ता देशों में से एक है, जबकि लाइबेरिया विश्व की सबसे बड़ी वाणिज्यिक शिपिंग रजिस्ट्रियों में शामिल है।
हालिया समुद्री हमलों का ब्योरा और भारतीय नाविकों की शहादत
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र, ओमान की खाड़ी, लाल सागर और काला सागर (Black Sea) में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे घातक हमलों पर गहरा दुख और चिंता जताई:
- MV Cape Dao (ओमान की खाड़ी): एंटीगुआ एंड बारबुडा के झंडे वाले इस बल्क कैरियर पर हमले में हाल ही में एक भारतीय नाविक की मौत हुई।
- EL GAIA (होर्मुज स्ट्रैट): पनामा के झंडे वाले इस तेल टैंकर पर हुए हमले के बाद से एक भारतीय क्रू मेंबर लापता है।
- MV OMORFI (काला सागर): 18 जुलाई को रूसी क्षेत्रीय जलक्षेत्र में हुए हमले में इसके चीफ ऑफिसर (भारतीय नागरिक) की जान चली गई।
- MV GOLDEN LEO (काला सागर): ओडिशा से रवाना होने के बाद हुए हमले में चार भारतीय नाविकों की मौत हुई।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि नागरिक जहाजरानी और निर्दोष समुद्रकर्मियों पर हमलों को किसी भी तर्क से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
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वैश्विक अर्थव्यवस्था और नाविकों की चुनौतियां
विदेश मंत्री ने आंकड़ों के जरिए समुद्री क्षेत्र के महत्व और नाविकों के संकट को रेखांकित किया:
- वैश्विक व्यापार निर्भरता: दुनिया भर में प्रतिदिन 140 अरब डॉलर से अधिक का अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता है, जिसका 80% से अधिक हिस्सा समुद्री जलमार्गों पर निर्भर है।
- मानव संसाधन: दुनिया भर के मर्चेंट नेवी बेड़े में लगभग 20 लाख नाविक कार्यरत हैं।
- मानसिक व शारीरिक चुनौतियां: नाविकों को न केवल हिंसक हमलों का खतरा है, बल्कि लंबे समय तक जहाजों पर फंसे रहने, स्वदेश वापसी में देरी, परिवार से अलगाव और अत्यधिक मानसिक तनाव जैसी गंभीर समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।
पीएम मोदी का आपातकालीन सहायता नेटवर्क प्रस्ताव
विदेश मंत्री ने उल्लेख किया कि हाल ही में भारत में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समुद्रकर्मियों के लिए एक 'आपातकालीन सहायता नेटवर्क' (Emergency Support Network) बनाने का प्रस्ताव दिया था।
प्रस्तावित नेटवर्क की कार्य प्रणाली:
- विभिन्न देशों के समुद्री प्राधिकारियों (Maritime Authorities) और संबंधित दूतावासों को सीधे जोड़ना।
- संकट के समय त्वरित सूचना साझा करना।
- आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना।
- परिवारों से संपर्क साधना और आवश्यकता पड़ने पर नाविकों की सुरक्षित निकासी (Evacuation) सुनिश्चित करना।
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कूटनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की राह
भारत समुद्री सुरक्षा के मुद्दे को वैश्विक मंचों पर लगातार उठाता रहा है:
- नवंबर 2025: भारत ने ग्रीस और फिलीपींस के साथ मिलकर UN सुरक्षा परिषद में 'Arria Formula Meeting' आयोजित की थी।
- अप्रैल 2026: UNSC में 'जलमार्गों की सुरक्षा' पर आयोजित उच्चस्तरीय ओपन डिबेट में भारत ने अग्रणी भूमिका निभाई थी।
GoF on S4 की रणनीति: यह नया समूह प्रमुख जहाज-मालिक देशों, फ्लैग स्टेट्स (जहाज पंजीकरण वाले देश) और नाविक आपूर्ति करने वाले राष्ट्रों को एक मंच पर लाएगा। जल्द ही सदस्य देशों की सहमति से इसके 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (ToR) और कार्यप्रणाली को अंतिम रूप दिया जाएगा।





